Devdutt Padikkal: भारतीय क्रिकेट टीम मौजूदा समय में अपनी टेस्ट टीम बनाने का प्रयास कर रही है. जिसके कारण ही चेतेश्वर पुजारा की जगह लेने वाले खिलाड़ी को लेकर भी चर्चा चल रही है. साई सुदर्शन को पहले इस नंबर के लिए मौका मिला. लेकिन वो उसका पूरी तरह से फायदा नहीं उठा सके. लेकिन टीम उन्हें बैक कर रही थी. ऐसे समय में उन्हें इंजरी हो गई. जिसके कारण ही देवदत्त पडिक्कल को मौका मिला. पडिक्कल ने उस मौके का फायदा उठाकर खुद को साबित कर दिया है.
देवदत्त पडिक्कल ने बीमारी को लेकर किया बड़ा खुलासा
साल 2022 में देवदत्त पडिक्कल को बीमारी के कारण क्रिकेट से दूर होना पड़ा था. उस दौर को याद करते हुए पडिक्कल ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘वो अब तक मेरी जिंदगी का निश्चित रूप से सबसे मुश्किल दौर था. ऐसा लग रहा था जैसे हर चीज मेरे खिलाफ जा रही है. मुझे लगा था कि शायद मेरा क्रिकेट करियर अब खत्म होने वाला है, क्योंकि जब आप भारत में लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहते हैं, तो ऐसा महसूस होता है कि बाकी सभी खिलाड़ी आपसे बहुत आगे निकल गए हैं. अगर आप एक सीजन भी नहीं खेल पाते हैं, तो यह एहसास होने लगता है. करीब दो साल तक अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से दूर रहना मेरे लिए बेहद मुश्किल था.’
पडिक्कल को लगा था कि वो इस दौर से आगे ही निकल नहीं पाएंगे. उस समय को याद करते हुए पडिक्कल ने आगे कहा, ‘मुझे सच में लगने लगा था कि शायद मैं इस मुश्किल दौर से कभी बाहर नहीं निकल पाऊंगा. लेकिन मैं उन सभी लोगों का बेहद आभारी हूं, जिन्होंने इस दौरान मेरी मदद की. डॉक्टरों, न्यूट्रिशनिस्ट और उन सभी लोगों का, जिन्होंने मुझे दोबारा उस स्थिति में पहुंचाया, जहां मैं हाई लेवल पर प्रदर्शन कर सकूं.’
सिर्फ कमबैक के बारे में सोच रहे थे पडिक्कल
बीमारी का असर देवदत्त पडिक्कल के प्रदर्शन पर भी साफ नजर आ रहा था. उस समय पडिक्कल सिर्फ फिट होने के बारे में सोच रहे थे. इस बारे में उन्होंने कहा, ‘उस मुश्किल दौर में मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी. मैं बस स्वस्थ होना चाहता था, फिट होना चाहता था और दोबारा क्रिकेट खेलना चाहता था. आखिरकार जब मैं उस दौर से बाहर निकला, तो मैं उस मुकाम पर वापस पहुंचने के लिए पहले से दोगुना दृढ़ निश्चयी था. जहां पर मुझे होना चाहिए था.’
उस समय को याद करते हुए देवदत्त पडिक्कल ने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह मेरी यात्रा का एक अहम हिस्सा था और मैं इस अनुभव के लिए सच में आभारी हूं. इसकी वजह से अब जब भी मुझे देश या अपने राज्य के लिए खेलने का मौका मिलता है, तो मेरे मन में पहले से कहीं ज्यादा आभार का भाव होता है. मुझे यह सोचकर बहुत खुशी और सौभाग्य का एहसास होता है कि मैं उस बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी समस्या से उबर पाया और दोबारा मैदान पर उतरकर क्रिकेट खेल सका.’