Science News in Hindi: ऑस्ट्रेलिया की शार्क बे में डॉल्फिन के शिकार करने का एक ऐसा तरीका सामने आया है जिसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है. यहां की बॉटलनोज डॉल्फिन अपनी नाक पर समुद्री स्पंज पहनकर समुद्र की तलहटी में शिकार करती हैं. यह नजारा किसी डरावनी फिल्म के सीन जैसा लगता है जहां शिकारी अपना चेहरा छिपाकर हमला करता है. दरअसल ये डॉल्फिन स्पंज को एक औजार की तरह इस्तेमाल करती हैं ताकि रेतीले फर्श पर छिपी मछलियों को पकड़ा जा सके. यह व्यवहार इतना जटिल है कि इसे सीखने में डॉल्फिन को सालों लग जाते हैं. यह पहली बार है जब किसी जंगली जानवर को इस तरह योजनाबद्ध तरीके से औजार का उपयोग करते हुए इतने करीब से फिल्माया गया है.
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नाक की सुरक्षा के लिए पहनती हैं कवच
शार्क बे डॉल्फिन रिसर्च प्रोजेक्ट के शोधकर्ताओं ने पाया कि समुद्र की तलहटी नुकीले पत्थरों और जहरीले जीवों से भरी होती है. जब डॉल्फिन रेत में छिपे शिकार को ढूंढने के लिए अपनी थूथन यानी नाक नीचे मारती हैं, तो स्पंज एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. यह स्पंज उनकी नाजुक त्वचा को कटने और चुभने से बचाता है. हालांकि इस औजार को इस्तेमाल करने की एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ती है. स्पंज पहनने से डॉल्फिन की सोनार शक्ति यानी सुनने की क्षमता प्रभावित होती है. इससे उनके द्वारा छोड़ी गई आवाजें गूंजकर जब वापस आती हैं, तो वे धुंधली हो जाती हैं, जिससे शिकार को सटीक पहचानना काफी मुश्किल हो जाता है.
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सीखने में लगते हैं सालों और कड़ी मेहनत
यह हुनर सीखना कोई बच्चों का खेल नहीं है. डॉल्फिन की इस आबादी में केवल 5 प्रतिशत सदस्य ही स्पंज का इस्तेमाल कर पाते हैं. डॉल्फिन के बच्चे अपनी मां के साथ रहकर तीन से चार साल तक इस तकनीक का अभ्यास करते हैं. चूंकि हर स्पंज का आकार और बनावट अलग होती है, इसलिए हर बार शिकार की चुनौती भी बदल जाती है. शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए देखा कि स्पंज की वजह से आवाज की तरंगें कैसे बिखर जाती हैं. इसी मानसिक दबाव और सीखने की लंबी प्रक्रिया की वजह से आसपास रहने वाली दूसरी डॉल्फिन इस तकनीक को नहीं अपना पाती हैं. यह एक ऐसी पारिवारिक कला है जो केवल मां से बच्चे तक ही सीमित रहती है.
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बढ़ते शोर से शिकार पर मंडराता खतरा
डॉल्फिन का यह शिकार पूरी तरह से आवाज पर निर्भर करता है, लेकिन बदलती दुनिया में यह तकनीक खतरे में पड़ सकती है. समुद्र में जहाजों के इंजन का शोर और मानवीय गतिविधियां पहले से ही डॉल्फिन के लिए मुश्किलें पैदा कर रही हैं. जब एक डॉल्फिन अपनी नाक पर स्पंज पहनती है, तो पहले से ही उसका सिग्नल कमजोर हो जाता है. ऐसे में बाहरी शोर इस शिकार को नामुमकिन बना सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर समुद्र का शोर इसी तरह बढ़ता रहा, तो डॉल्फिन की यह खास संस्कृति हमेशा के लिए खत्म हो सकती है. यह शोध हमें बताता है कि कैसे एक छोटा सा औजार पूरे परिवार के जीने के तरीके और उनकी दुनिया को समझने के नजरिए को बदल देता है.
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