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पाताल से निकला 2.5 करोड़ साल पुराना 'राक्षसी' जीव! दांतों से चबा डालता था हड्डियां, वैज्ञानिकों की उड़ी नींद

Science News: वैज्ञानिकों ने 2.5 करोड़ साल पुराने प्लैटिपस के जीवाश्म खोजे हैं, जिसके पास बेहद मजबूत दांत और खूंखार शिकार करने की शक्ति थी. यह खोज इस जीव के विकासवादी इतिहास को पूरी तरह बदल देगी.

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Science News in Hindi: दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के सुदूर इलाकों में वैज्ञानिकों को एक ऐसे जीव के अवशेष मिले हैं जिसने विकासवाद की थ्योरी को नई दिशा दे दी है. करीब 2.5 करोड़ साल पुराने ये जीवाश्म ‘ओबडु रोडोन इंसिग्निस’ नाम के एक प्राचीन प्लैटिपस के हैं. ‘ऑस्ट्रेलियन जूलॉजिस्ट’ पत्रिका में छपी इस रिसर्च के अनुसार ये जीव आज के प्लैटिपस के मुकाबले कहीं ज्यादा खतरनाक और ताकतवर थे. दशकों से वैज्ञानिक इस प्रजाति के बारे में पुख्ता जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब मिले दांतों और कंधे की हड्डियों के अवशेषों ने इस रहस्यमयी स्तनधारी जीव के अतीत की सबसे साफ तस्वीर पेश की है.

दांतों वाला खूंखार शिकारी और उसकी जबरदस्त पकड़

इस खोज की सबसे हैरान करने वाली बात इन प्राचीन जीवों के दांत हैं. आज के आधुनिक प्लैटिपस के दांत नहीं होते और वे नरम भोजन पर निर्भर रहते हैं, लेकिन करोड़ों साल पहले रहने वाले इनके पूर्वजों के पास पूरी तरह विकसित और मजबूत दांत हुआ करते थे. शोधकर्ताओं का कहना है कि इन पैने दांतों की मदद से ये जीव केकड़ों और कड़े कवच वाले पानी के जीवों को आसानी से चबा जाते थे. इनकी काटने की शक्ति यानी बाइट फोर्स इतनी ज्यादा थी कि ये अपने शिकार की हड्डियों और खोल को पल भर में चूरा कर सकते थे. यह खोज बताती है कि ये जीव केवल शांत तैरने वाले जानवर नहीं बल्कि एक आक्रामक शिकारी थे.

यह भी पढ़ें: भारतीय छात्र ने खोजा करोड़ों साल पुराना ‘खूंखार डायनासोर’! दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिक भी हैरान!

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आधुनिक प्लैटिपस जैसा शरीर और बेजोड़ तैरने की कला

दांतों के अलावा वैज्ञानिकों को इस जीव के कंधे की एक खास हड्डी भी मिली है जिसे ‘स्कैपुलोकोराकोइड’ कहा जाता है. इस हड्डी के अध्ययन से पता चला है कि प्राचीन प्लैटिपस के शरीर की बनावट और तैरने की क्षमता आज के प्लैटिपस के बिल्कुल समान थी. इसका मतलब यह है कि पिछले लाखों सालों में इस जीव के खाने की आदतों और दांतों में तो बदलाव आया, लेकिन इनके पानी में तैरने और चलने का तरीका वैसा ही रहा. मजबूत अंगों और शक्तिशाली जबड़ों का यह मेल उन्हें अपने दौर का एक माहिर जलीय शिकारी बनाता था जो किसी भी जलधारा में आसानी से अपना रास्ता बना सकते थे.

रेगिस्तान के नीचे छिपी थी एक हरी-भरी दुनिया

आज ऑस्ट्रेलिया का जो हिस्सा पूरी तरह सूखा और रेगिस्तानी दिखता है, वह 2.5 करोड़ साल पहले झीलों और नदियों से भरा हुआ था. उस दौर में वहां घने जंगल हुआ करते थे जहां फ्लेमिंगो, ताजे पानी की डॉल्फिन और फेफड़ों से सांस लेने वाली मछलियां पाई जाती थीं. इन्ही नदियों के तल में यह प्राचीन प्लैटिपस रहता था जिसके अवशेष अब वैज्ञानिकों के हाथ लगे हैं. शोधकर्ता ट्रेवर वर्थी के अनुसार यह खोज न केवल प्लैटिपस के विकास को समझाती है बल्कि यह भी बताती है कि कैसे समय के साथ ऑस्ट्रेलिया का पर्यावरण पूरी तरह बदल गया. वैज्ञानिक अब भी इस रेगिस्तान में नए अवशेषों की तलाश कर रहे हैं ताकि इतिहास के और पन्ने खोले जा सकें.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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