Science News: नासा द्वारा साल 1977 में लॉन्च किया गया वॉयेजर 1 अंतरिक्ष यान इस साल नवंबर में पृथ्वी से एक लाइट-डे यानी प्रकाश के एक दिन की दूरी पर पहुंच जाएगा. यह दूरी लगभग 26 अरब किलोमीटर के बराबर है और इतनी दूर आज तक कोई भी मानव निर्मित वस्तु नहीं पहुंच सकी है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि सिर्फ पांच साल के मिशन के लिए बनाया गया यह यान लगभग 50 साल बाद भी अंतरिक्ष से लगातार काम कर रहा है. मिशन की प्रोजेक्ट साइंटिस्ट डॉक्टर लिंडा स्पिलकर के मुताबिक इस यान के कंप्यूटर में आज की कार खोलने वाली चाबी यानी की-फोब जितनी ही मेमोरी है. इतनी पुरानी तकनीक के बावजूद वैज्ञानिकों का इससे संपर्क बने रहना अपने समय की एक अद्भुत मिसाल है.
चंद्रमाओं पर खोजे सक्रिय ज्वालामुखी और महासागर
वॉयेजर मिशन की शुरुआत 1970 के दशक के अंत में अंतरिक्ष वैज्ञानिकों द्वारा बाहरी चार बड़े ग्रहों की एक दुर्लभ स्थिति का अनुमान लगाने के बाद हुई थी. वैज्ञानिकों ने इसे ‘ग्रैंड टूर’ यानी महायात्रा का नाम दिया था. इससे पहले इंसानों के लिए बृहस्पति और शनि सिर्फ रोशनी के छोटे धब्बे थे, लेकिन वॉयेजर ने इसे पूरी तरह बदल दिया. वॉयेजर 1 ने बृहस्पति के चंद्रमा ‘आयो’ पर पृथ्वी से बाहर पहली बार सक्रिय ज्वालामुखी देखा, जिसने सबको हैरान कर दिया. वहीं वॉयेजर 2 की तस्वीरों से पता चला कि ‘यूरोपा’ चंद्रमा की बर्फीली परत के नीचे पानी का एक विशाल महासागर हो सकता है, जहां आज भी जीवन की उम्मीद जताई जा रही है.
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धुंधला नीला बिंदु और तारों के बीच का अनजान सफर
साल 1990 में जब वॉयेजर 1 नेपच्यून से भी आगे निकल गया था और उसका कैमरा हमेशा के लिए बंद होने वाला था, तब उसने पीछे मुड़कर पृथ्वी की एक मशहूर तस्वीर ली थी. इस तस्वीर में हमारी धरती अंतरिक्ष की विशालता में एक छोटे धुंधले नीले बिंदु जैसी दिखाई दी. मशहूर खगोलविद कार्ल सागन ने तब कहा था कि इसी बिंदु पर हर वो इंसान मौजूद है जिसने कभी जन्म लिया, इसलिए हमें अपने ग्रह की परवाह करनी चाहिए. इसके बाद साल 2012 में वॉयेजर 1 सूर्य के प्रभाव क्षेत्र को पार करके तारों के बीच की अनजान जगह यानी इंटरस्टेलर स्पेस में दाखिल होने वाला पहला मानव निर्मित यान बना और आज भी वहां से डेटा भेज रहा है.
एलियंस के लिए पृथ्वी का परिचय पत्र
वॉयेजर प्रोब्स सिर्फ पृथ्वी को डेटा नहीं भेज रहे हैं, बल्कि वे अपने साथ 12 इंच की एक सुनहरी परत वाली डिस्क भी ले गए हैं. इस डिस्क में दुनिया की 55 अलग-अलग भाषाओं के संदेश, 115 तस्वीरें और धरती के बादलों के गरजने व संगीत की आवाजें रिकॉर्ड हैं. यह डिस्क अंतरिक्ष में मौजूद संभावित एलियंस के लिए इंसानों का एक परिचय पत्र है, जो एक अरब साल तक सुरक्षित रह सकती है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह सुनहरी डिस्क शायद इंसानी सभ्यता के खत्म होने के बाद भी ब्रह्मांड में तैरती रहेगी. नासा को उम्मीद है कि साल 2030 के दशक तक इस यान के उपकरण काम करते रहेंगे और यह खुद तय करेगा कि इसे कब रुकना है.
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