Science News in Hindi: नासा ने हाल ही में आर्टेमिस 2 मिशन की 12,000 से अधिक नई और दुर्लभ तस्वीरें सार्वजनिक की हैं. अप्रैल के महीने में 10 दिनों तक चली इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद के सुदूर हिस्से यानी ‘फार साइड’ का चक्कर लगाया था. जैसे दोस्त छुट्टियों पर जाकर ढेर सारी यादें समेटते हैं, वैसे ही इन चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद और ब्रह्मांड के ऐसे नजारे कैद किए जो पहले कभी नहीं देखे गए थे. नासा के सार्वजनिक संग्रह में अपलोड की गई ये तस्वीरें दिखाती हैं कि कैसे ओरियन कैप्सूल के अंदर से ब्रह्मांड एक अलग ही रूप में नजर आता है. इन तस्वीरों में पृथ्वी का गायब होना और चांद की सतह का बारीकी से दिखना सबसे ज्यादा चर्चा में है.
चांद की सतह और अंतरिक्ष का अद्भुत नजारा
6 अप्रैल को जब ओरियन कैप्सूल चंद्रमा की सतह के सबसे करीब था, तब चालक दल ने चांद के उस हिस्से को देखा जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता. सूरज की किरणें चांद की उबड़-खाबड़ चोटियों पर इस तरह गिर रही थीं जैसे वे चांदी की तरह चमक रही हों. चालक दल ने चंद्रमा के ‘टर्मिनेटर’ यानी उस रेखा की तस्वीरें लीं जहां दिन और रात का मिलन होता है. इस क्षेत्र में उन्होंने अंतरिक्ष से गिरने वाले पत्थरों की चमक को भी कैद किया. इन तस्वीरों में चांद के बड़े-बड़े गड्ढे और ऊंचे पहाड़ इतनी स्पष्टता के साथ दिखाई दे रहे हैं कि वैज्ञानिक अब उनके अध्ययन में जुट गए हैं.
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जब आंखों के सामने से ओझल हो गई पृथ्वी
इन 12,000 तस्वीरों में सबसे भावुक कर देने वाला पल वह था जब हमारी नीली धरती धीरे-धीरे चंद्रमा के क्षितिज के पीछे छिपने लगी. अंतरिक्ष यात्रियों ने इसे ‘अर्थसेट’ का नाम दिया है. ओरियन यान की खिड़की से लिए गए इन शॉट्स में कांच पर पड़ने वाली चमक और प्रतिबिंब यह याद दिलाते हैं कि एक छोटे से कैप्सूल में चार इंसान ब्रह्मांड की अनंत गहराई में तैर रहे थे. एक अन्य तस्वीर में अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच खिड़की के बाहर दिख रही धरती की पतली सी लकीर के साथ मुस्कुराहट बिखेरती नजर आ रही हैं. ये पल मानवता के साहस और तकनीक की जीत को बयां करते हैं.
भविष्य के मिशन और वैज्ञानिक खोज की उम्मीद
आर्टेमिस 2 मिशन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन ये तस्वीरें आने वाले कई वर्षों तक वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय बनी रहेंगी. इन तस्वीरों में न केवल चंद्रमा, बल्कि मिल्की वे यानी हमारी आकाशगंगा का वह रूप भी कैद हुआ है जो पृथ्वी की रोशनी के बिना बिल्कुल साफ दिखता है. नासा अब इन आंकड़ों का इस्तेमाल 2028 में होने वाले अगले मिशन के लिए कर रहा है, जब इंसान फिर से चांद की सतह पर कदम रखेगा. ओरियन की गोल खिड़कियों से ली गई ये तस्वीरें उस रोमांचक भविष्य की एक छोटी सी झलक मात्र हैं, जहां इंसान अब केवल चांद के चक्कर ही नहीं लगाएगा बल्कि वहां रहने की तैयारी भी करेगा.
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