मुख्य बिंदु

  • चीन ने लॉन्ग मार्च 10B के लिए समुद्र में बूस्टर रिकवरी सिस्टम का सफल परीक्षण किया.
  • इस रॉकेट में लैंडिंग लेग्स के बजाय लैंडिंग हुक और फ्लोटिंग नेट का इस्तेमाल किया जाता है.
  • इस टेक्नोलॉजी को लॉन्च की लागत कम करने और पेलोड क्षमता बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है.
  • लॉन्ग मार्च 10B, 2030 से पहले चीन के इंसानों वाले मून मिशन में मदद करेगा.
  • चीन का टारगेट है कि रिकवर किए गए बूस्टर का यूज इस साल के आखिर में किसी और लॉन्च के लिए किया जाए.

China Tests Sea-Based Rocket Booster Recovery System: चीन ने अपनी स्पेस टेक्नोलॉजी में बड़ा मुकाम हासिल किया है. भारत के इस पड़ोसी मुल्क ने अपने 'लॉन्ग मार्च 10B' रॉकेट के बूस्टर के लिए समुद्र में रिकवरी सिस्टम का कामयाबी से टेस्ट करके अपने दोबारा इस्तेमाल होने वाले स्पेस टेक्नोलॉजी प्रोग्राम में एक और अचीवमेंट हासिल की है. उम्मीद है कि ये परफॉर्मेंस चाइना के उस लॉन्ग टर्म गोल को पूरा करने में मदद करेगा, जिसमें लॉन्च की लागत कम करना और फ्यूचर के स्पेस एक्सप्लोरेशन मिशन को मजबूत करना शामिल है.

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इस मिशन में क्या है खास?

SpaceX के Falcon 9 के उलट, जो तय पैड या ड्रोन शिप पर लैंडिंग लेग्स की मदद से वर्टिकली लैंड होता है, 'लॉन्ग मार्च 10B' एक अलग तरीका अपनाता है. इस रॉकेट को 4 खास तरह के लैंडिंग हुक के साथ डिजाइन किया गया है, जिनकी मदद से लौटते हुए बूस्टर को समुद्र में तैरते हुए रिकवरी प्लेटफॉर्म पर लगे एक बड़े जाल से पकड़ा जा सकता है.

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इसके क्या हैं फायदे?

China Academy of Launch Vehicle Technology (CALT) के जानकारों के मुताबिक, नेट की मदद से रिकवरी करने वाले इस सिस्टम के कई इंजीनियरिंग फायदे हैं. इससे रॉकेट पर भारी लैंडिंग इक्विपमेंट की जरूरत कम हो जाती है, बूस्टर का कुल वजन घटता है और रॉकेट ज्यादा पेलोड के साथ स्पेस में जा सकता है. फ्लेक्सिबल होने के कारण ये सिस्टम लैंडिंग में होने वाले मामूली बदलावों को भी संभाल सकता है, जिससे कामयाब रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है.

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कम आएगा खर्च

दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट टेक्नोलॉजी ने लॉन्च की लागत को काफी कम करके ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव किया है. SpaceX ने ऑपरेशनल रियूजेबल बूस्टर की शुरुआत की थी, जबकि हाल के सालों में दूसरी कंपनियों ने भी इसमें तरक्की की है. चीन तकरीबन एक दशक से ऐसी क्षमताओं को विकसित करने में निवेश कर रहा है और उसने कई होवर टेस्ट, वर्टिकल लैंडिंग एक्सपेरिमेंट और ऑर्बिटल रिकवरी डेमोंस्ट्रेशन किए हैं.

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ज्यादा मिशन पूरे करने का प्लान

ये डेवलपमेंट इसलिए भी खास है क्योंकि चीन अपने कमर्शियल सैटेलाइट नेटवर्क और नेशनल स्पेस प्रोग्राम का विस्तार कर रहा है. लॉन्च का खर्च कम होने से ज्यादा मिशन पूरे किए जा सकेंगे और ग्लोबल स्पेस सेक्टर में देश की कॉम्पिटिटिवनेस बढ़ेगी.

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इंवेस्टमेंट बढ़ने की उम्मीद

चीन की प्राइवेट एयरोस्पेस कंपनियां भी दोबारा इस्तेमाल होने वाले लॉन्च सिस्टम डेवलप करने की कोशिशें तेज कर रही हैं. सरकार ने एडवांस्ड रॉकेट टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली कंपनियों में इंवेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए फंड जुटाने के नियमों में ढील देने जैसे कदम उठाए हैं. हालांकि, सरकारी संगठनों और प्राइवेट कंपनियों, दोनों की पिछली रिकवरी कोशिशें आखिरी लैंडिंग स्टेज को पूरा करने में नाकाम रही थीं.

इंसान को चांद पर भेजने की तैयारी

'लॉन्ग मार्च 10B' बड़े 'लॉन्ग मार्च 10' रॉकेट परिवार का हिस्सा है, जिसे इस दशक के आखिर तक चीन के चंद्रमा पर इंसानी मिशन के लिए विकसित किया जा रहा है. अधिकारियों का मानना ​​है कि हाल की कामयाब रिकवरी टेस्ट से भविष्य के लूनर ऑपरेशन के लिए जरूरी इंजीनियरिंग डेटा मिलेगा. चीन के सरकारी मीडिया ने बताया कि रिकवर किए गए बूस्टर को ठीक करके साल के आखिर तक फिर से उड़ाए जाने की उम्मीद है, जो रेगुलर रियूजेबल रॉकेट ऑपरेशन की दिशा में एक और अहम कदम होगा.

निष्कर्ष

चीन का समुद्र पर बेस्ड बूस्टर रिकवरी का कामयाब टेस्ट, दोबारा इस्तेमाल होने वाली लॉन्च टेक्नोलॉजी के विकास में एक बड़ा अचीवमेंट है. रॉकेट का वजन कम करके और बूस्टर को दोबारा यूज करने की फैसिलिटी देकर, ये नया सिस्टम फ्यूचर के स्पेस मिशन को ज्यादा सस्ता और एफिशिएंट बना सकता है. ये कामयाबी कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च और इंसानों वाले मून मिशन में चीन के इरादों को भी मजबूत करती है. अगर भविष्य में रिकवरी और दोबारा इस्तेमाल के मिशन सक्सेसफुल होते रहे, तो लॉन्ग मार्च 10B प्रोग्राम ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री में चीन की मौजूदगी बढ़ाने में अहम रोल अदा कर सकता है.