वैज्ञानिकों ने ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी हिस्से में मौजूद पिलबारा रेगिस्तान में धरती के सबसे पुराने एस्टेरॉयड इम्पैक्ट क्रेटर की पहचान की है. नॉर्थ पोल डोम या मिराल्गा नाम से पहचाने जाने वाले इस क्रेटर की उम्र लगभग 3.024 अरब साल आंकी गई है. ये खोज पृथ्वी के शुरुआती इतिहास को समझने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. शुरुआत में कुछ वैज्ञानिकों का मानना था कि ये क्रेटर 3.47 अरब साल पुराना है, जबकि दूसरी रिसर्च टीम ने इसकी उम्र 2.77 अरब साल से कम बताई थी. इस विवाद को खत्म करने के लिए रिसर्चर्स ने यहां मौजूद खनिजों और चट्टानों का दोबारा गहराई से अध्ययन किया. नई रिसर्च में साफ हुआ कि यह एस्टेरॉयड टक्कर करीब 3.024 अरब साल पहले हुई थी.

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क्या है खास?

पिलबारा वैज्ञानिकों के लिए बेहद खास माना जाता है. यहां पृथ्वी की सबसे पुरानी चट्टानें आज भी सुरक्षित हैं. दुनिया के कई हिस्सों में अरबों साल पुरानी चट्टानें नष्ट हो चुकी हैं, लेकिन पिलबारा में शुरुआती पृथ्वी के कई भूवैज्ञानिक प्रमाण अब भी मौजूद हैं. यही वजह है कि वैज्ञानिक इस इलाके को पृथ्वी के अतीत की खिड़की मानते हैं. नॉर्थ पोल डोम आज किसी सामान्य इलाके जैसा दिखाई देता है. अरबों साल बीतने के कारण इसके बाहरी हिस्से लगभग मिट चुके हैं. हालांकि वैज्ञानिकों को यहां शैटर कोन्स नाम की खास चट्टानें मिलीं. ये चट्टानें सिर्फ तब बनती हैं जब कोई बड़ा एस्टेरॉयड पृथ्वी से टकराता है और बहुत शक्तिशाली शॉकवेव पैदा होती है. इन्हीं चट्टानों ने इस स्थान को इम्पैक्ट क्रेटर साबित करने में अहम भूमिका निभाई.

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जिरकॉन क्रिस्टल की भूमिका

इस रिसर्च में जिरकॉन क्रिस्टल सबसे महत्वपूर्ण साबित हुआ. जिरकॉन एक बेहद मजबूत खनिज है, जो अरबों साल तक अपनी जानकारी सुरक्षित रख सकता है. वैज्ञानिकों ने पाया कि एस्टेरॉयड की टक्कर से पैदा हुई बेहद ज्यादा गर्मी ने इन क्रिस्टलों की संरचना बदल दी थी. इसके बाद यूरेनियम-लेड डेटिंग तकनीक की मदद से उनकी उम्र का पता लगाया गया. रिसर्चर्स ने सिर्फ जिरकॉन ही नहीं बल्कि एपेटाइट क्रिस्टल की भी स्टडी की. एपेटाइट से मिली उम्र करीब 3.019 अरब साल निकली, जो जिरकॉन से मिले आंकड़ों से लगभग मेल खाती है. इससे वैज्ञानिकों का निष्कर्ष और मजबूत हो गया. इससे पहले पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का यारबुब्बा क्रेटर दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात इम्पैक्ट क्रेटर माना जाता था, जिसकी उम्र 2.23 अरब साल थी. लेकिन नॉर्थ पोल डोम ने अब ये रिकॉर्ड तोड़ दिया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज 3 अरब साल पुरानी पृथ्वी के वातावरण, उसकी सतह और जीवन की शुरुआती परिस्थितियों को समझने में मदद करेगी. यह भी पता लगाने में सहायता मिलेगी कि शुरुआती सौर मंडल में बड़े एस्टेरॉयड पृथ्वी को किस तरह प्रभावित करते थे और उनका जीवन के विकास पर क्या असर पड़ा.

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