Treasure Discovery: साल 1868 में मध्य जर्मनी के हिल्डेशाइम शहर के पास जब शाही प्रशिया सेना के सैनिक एक नई शूटिंग रेंज बना रहे थे, तब उनके फावड़े एक ऐसी चीज से टकराए जिसने पुरातत्व जगत में हलचल मचा दी. खुदाई के दौरान वहां से दर्जनों प्राचीन चांदी की कलाकृतियों का एक बड़ा जखीरा मिला, जिसे 'हिल्डेशाइम खजाना' कहा जाता है. इस खजाने में शानदार और महंगे बर्तन शामिल थे, जिनमें सबसे खास 'एथेना बाउल' यानी एथेना की कटोरी थी. इतिहासकारों का मानना है कि यह बेशकीमती सामान रोमन सैन्य कमांडर पब्लियस क्विंटिलियस वारस या किसी अन्य बड़े अधिकारी का हो सकता है, जो पहली शताब्दी में जर्मन जनजातियों के खिलाफ लड़ रहा था.

सोने और चांदी से बनी कलाकृति की खासियत

बर्लिन के अल्टेस म्यूजियम में रखी यह एथेना कटोरी कला का एक अद्भुत नमूना है. करीब 10 इंच व्यास वाली यह चांदी की कटोरी काफी भारी है, जिसका वजन लगभग 2 किलोग्राम है. इस कटोरी के केंद्र में ज्ञान और शक्ति की यूनानी देवी एथेना की आकृति बनी है, जो एक चट्टान पर बैठी हुई हैं. उनके सिर पर एक कलगीदार हेलमेट है और हाथ के नीचे ढाल है. इस कटोरी की सबसे बड़ी खूबी इसमें इस्तेमाल किया गया सोना है. एथेना की पोशाक, उनकी ढाल, चट्टानें और उनके पवित्र उल्लू पर सोने की नक्काशी की गई है, जो इसे और भी कीमती बनाती है.

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दो अलग-अलग सदियों का अनूठा संगम

पुरातत्वविदों के अनुसार इस कटोरी का निर्माण किसी एक समय में नहीं हुआ था. कटोरी के बीच में लगी एथेना की प्रतीक आकृति यानी एम्बलेम संभवतः दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में बनाई गई थी. बाद में पहली शताब्दी ईस्वी में इस पुरानी आकृति के लिए एक नई कटोरी तैयार की गई. हिल्डेशाइम खजाने से मिले कई बर्तनों पर मरम्मत और घिसावट के निशान मिले हैं, जिससे पता चलता है कि इन बर्तनों को लंबे समय तक इस्तेमाल किया गया और इन्हें सालों की मेहनत से इकट्ठा किया गया था. यह इस बात का सबूत है कि उस दौर में रोमन सेनापति अपने साथ युद्ध के मैदान में भी शाही ठाठ-बाट का सामान रखते थे.

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सेनापति वारस की हार और खजाने का राज

विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर बहस है कि यह खजाना आखिर वहां पहुंचा कैसे. सबसे मशहूर थ्योरी रोमन जनरल पब्लियस क्विंटिलियस वारस से जुड़ी है, जो 9 ईस्वी में ट्यूटोबर्ग फॉरेस्ट की लड़ाई में जर्मन जनजातियों से बुरी तरह हार गए थे. इस हार में रोम की तीन बड़ी सेनाएं खत्म हो गई थीं, जिससे सम्राट ऑगस्टस इतने दुखी हुए कि उन्होंने चिल्लाकर कहा था, 'वारस, मुझे मेरी सेना वापस दे दो.' हार के बाद वारस ने आत्महत्या कर ली थी. माना जाता है कि या तो वारस ने हार के डर से यह खजाना छिपा दिया था, या फिर जर्मन कबीलों ने इसे लूटकर जमीन में दबा दिया था जो सदियों बाद बाहर निकला.

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