Sawan 2025: सावन का महीना हिंदू धर्म में अत्यंत पावन माना जाता है और इस दौरान भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी होती है। इस महीने में भगवान शिव को दूध लोग अर्पित करते हैं, जिसे 'दुग्धाभिषेक' कहा जाता है। शिव पुराण के अनुसार, सावन के महीने में शिवलिंग पर दूध अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है। इसके साथ ही स्वस्थ जीवन प्राप्त होता है। प्रतिदिन भगवान शिव को दूध अर्पित करने से आयु में वृद्धि होती है।

क्यों अर्पित किया जाता है दूध

आयुर्वेद में दूध की तासीर को ठंडा माना गया है। शिवपुराण के अनुसार देवताओं और असुरों में जब अमृत को लेकर समुद्र मंथन हुआ तो उससे हलाहल विष निकला था। यह विष इतना भयंकर था कि इससे पूरी सृष्टि का नाश हो सकता था। इस समस्या से मुक्ति के लिए सभी देवताओं ने भगवान शिव की उपासना की। सृष्टि को बचाने के लिए भगवान भोलेनाथ ने उस हलाहल विष का पान कर लिया और उसको अपने कंठ में ही रोक लिया। इस कारण प्रभु का कंठ नीला पड़ गया, जिस कारण वे 'नीलकंठ' कहलाए। हलाहल विष के प्रभाव से भगवान शिव के शरीर का तापमान बढ़ने लगा था। इस तापमान को कम करने के लिए देवताओं ने प्रभु का जल और दूध से अभिषेक किया था। जिस समय भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया गया वह समय सावन का था। इस कारण भगवान शिव को सावन में दूध अर्पित किया जाता है।

यह है वैज्ञानिक कारण

भगवान शिव पर दूध अर्पित करने का वैज्ञानिक कारण भी है। आयुर्वेद के अनुसार बारिश के मौसम में दूध पीने से पेट खराब हो सकता है। वहीं, भगवान शिव हर उस चीज को खुद ग्रहण कर लेते हैं, जो उनके भक्तों के लिए नुकसानदायक हो, क्योंकि उन्होंने विषपान भी इसी कारण किया था। इसी कारण भगवान शिव को सावन में दूध, दही, धतूरा, भांग आदि चढ़ाया जाता है। यह सभी चीजें खाने योग्य नहीं होती हैं। दूध या दही सावन में नहीं खाया जाता है। इस कारण यह भगवान शिव पर अर्पित किया जाता है। डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। ये भी पढ़ें- शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? जानिए नियम