Pradosh Vrat Niyam: देवों के देव महादेव को समर्पित प्रदोष व्रत का सनातन धर्म के लोगों के लिए खास महत्व है, जो प्रत्येक साल में 24 बार रखा जाता है. मान्यता है कि प्रदोष व्रत में शिव जी और माता पार्वती की पूजा करने से पाप नष्ट होते हैं. साथ ही नकारात्मक ऊर्जा और विभिन्न प्रकार के कष्टों-दोषों से मुक्ति मिलती है. हालांकि, प्रदोष व्रत की पूजा और खाने से जुड़े कई नियम हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है. आज यहां पर हम आपको प्रदोष व्रत के खाने से जुड़े नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं.
प्रदोष व्रत कैसे रखा जाता है?
प्रदोष व्रत निर्जला, फलाहार और एकभुक्त तीनों तरीकों से रखा जा सकता है. निर्जला व्रत में जहां पूरे दिन बिना कुछ खाए और पिए रहना होता है. वहीं, फलाहार में दिन में 2 से 3 बार फल और पानी का सेवन किया जा सकता है. इसके अलावा एकभुक्त व्रत में दिन में केवल एक बार ही भोजन किया जाता है.
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प्रदोष व्रत में क्या खा सकते हैं? (what can we eat during pradosh vrat in hindi language)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत में दूध, हरी मूंग, साबूदाना, सूखे मेवे, पनीर, दही, छाछ, घी, मक्खन, पनीर, रबड़ी, मावा, समा के चावल, आलू, शकरकंद, अरबी, लौकी, टमाटर, नारियल पानी, कद्दू, कच्चा पपीता और कच्चे केले आदि का सेवन किया जा सकता है. इसके अलावा राजगिरा, मखाने, कट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें खा सकते हैं, लेकिन प्रदोष व्रत के खाने में केवल सेंधा नमक का ही इस्तेमाल किया जाता है.
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प्रदोष व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?
मान्यता है कि प्रदोष व्रत में किसी भी तरह का अनाज व उससे बनी चीजें नहीं खानी चाहिए. साथ ही प्याज-लहसुन जैसी तामसिक चीजों का सेवन करने से बचना चाहिए.
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प्रदोष व्रत के खाने से जुड़े नियम
- खाना खाने के बाद कुल्ला जरूर करें.
- साफ हाथ से एक जगह पर बैठकर ही खाना खाएं.
- बार-बार थोड़ा-थोड़ा खाना खाने की जगह एक बार में ही खाना खाएं.
- सूर्यास्त के दौरान खाना खाने से बचें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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