धार्मिक मान्यता के अनुसार, वट सावित्री व्रत का पारण शाम में वट वृक्ष की पूजा करने के बाद बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर पानी या कोई मीठी चीज खाकर करना चाहिए।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, वट सावित्री व्रत का पारण शाम में करना शुभ रहता है। आज यानी 26 मई 2025 को शाम 7 बजे के बाद व्रती महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करने के बाद व्रत का पारण कर सकती हैं।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और बिहार के गया के बाद अब यूपी के उन्नाव से महिलाओं की वट वृक्ष की पूजा करते हुए वीडियो और तस्वीरें सामने आ रही हैं। आज उन्नाव में भी बड़ी संख्या में महिलाओं ने सोलह श्रृंगार करके वट पेड़ की पूजा की। साथ ही वृक्ष की परिक्रमा करते हुए उस पर कच्चा सूत बांधा।
बिहार के गया में भी पति की दीर्घायु के लिए सुहागिन महिलाओं ने सोलह श्रृंगार करके वट वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना की।
पौराणिक कथा के अनुसार, मद्रदेश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री थी, जो सत्यवान से विवाह करना चाहती थी। हालांकि विवाह से पहले नारद मुनि ने सावित्री को बताया था कि द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान केवल एक साल और जीवित रहेंगे। लेकिन इसके बाद भी सावित्री ने सत्यवान से शादी की। तय समय पर जब यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए तो सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे बैठकर कड़ी तपस्या की। सावित्री की भक्ति से यमराज प्रसन्न हुए और उनसे वरदान मांगने को कहा। सावित्री ने यमराज से 100 पुत्रों का वरदान मांगा, जिसके लिए सत्यवान का जीवित रहना जरूरी था।
अंततः यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए। इसी के बाद से वट सावित्री व्रत की परंपरा का जन्म हुआ। मान्यता है कि आज भी महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा व परिक्रमा करती हैं तो उनके पति का जीवन लंबा, स्वस्थ और सफल रहता है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं ने शुभ मुहूर्त में वट वृक्ष के नीचे बैठकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की, जिनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
watch | Uttar Pradesh: Women take part in rituals, as they perform Vat Savitri puja today. Visuals from Prayagraj pic.twitter.com/JM9n2PuFRA
— ANI (@ANI) May 26, 2025