Varaha Jayanti 2026: आज 13 सितंबर 2026 दिन रविवार को वराह जयंती का पर्व मनाया जा रहा है. यह दिन विष्णु भगवान के तीसरे अवतार वराह की जयंती के रूप में मनाया जाता है. आज वराह जयंती पर वराह देव की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और आरती के बारे में आप यहां जान सकते हैं. वराह जयंती के अवसर पर वराह देव को प्रसन्न कर श्रीहरी के आशीर्वाद के लिए आप यहां बताई गई विधि से पूजा अर्चना करें. आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
वराह जयंती 2026 शुभ मुहूर्त (Varaha Jayanti 2026 Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त - 04:32 ए एम से 05:19 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 04:55 ए एम से 06:05 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 11:52 ए एम से 12:42 पी एम
विजय मुहूर्त - 02:21 पी एम से 03:10 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 06:29 पी एम से 06:52 पी एम
सायाह्न सन्ध्या - 06:29 पी एम से 07:38 पी एम
वराह जयंती मुहूर्त - 01:31 पी एम से 04:00 पी एम
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वराह जयंती पर शुभ योग
सर्वार्थ सिद्धि योग - 06:05 ए एम से 01:07 पी एम
अमृत सिद्धि योग - 06:05 ए एम से 01:07 पी एम
रवि योग - 01:07 पी एम से 09:53 पी एम
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वराह जयंती पर सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है. यह तीनों योग बेहद शुभ माने जाते हैं. इन शुभ योग में पूजा और शुभ कार्य करना बेहद शुभ होता है. द्रिंक पंचांग के अनुसार, वराह जयंती का मुहूर्त दोपहर को 1 बजकर 31 मिनट से लेकर शाम को 4 बजे तक रहेगा.
वराह जयंती पूजा विधि (Varaha Jayanti 2026 Puja Vidhi)
आज वराह जयंती के दिन सुबह उठने के बाद स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद घर के मंदिर की सफाई कर पूजा स्थान पर लकड़ी की चौकी रखें. लाल या पीला कपड़ा बिछाकर विष्णु भगवान के वराह रूप की प्रतिमा स्थापित करें. वराह भगवान को पीले वस्त्र, पीले फूल, मिठाई और फल अर्पित करें. भगवान की प्रतिमा के समक्ष दीप और धूप जलाएं. भगवान विष्णु के वराह रूप को समर्पित ‘ॐ वाराहाय नमः’ मंत्र का जाप करें. इसके साथ ही आरती कर पूजा संपन्न करें.
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वराह भगवान की आरती (Varaha Dev Ki Aarti)
आरती वराह अवतारा, धरणी उद्धरे लियो अवतारा॥
भू को लेकर दैत्य पाताला, हिरण्याक्ष को मार्यो आला॥
धरयो रूप विकराल भयावन, पुच्छ उठायो, रूप सुहावन॥
वेद बचायो, धर्म बचाया, भू देवी को कष्ट मिटाया॥
जल में घुसि जो भू हर लाया, तब प्रभु वराह रूप दिखाया॥
शूकर रूप पर देव लजाए, पर प्रभु की लीला ना समझ पाए॥
त्रैलोक्य जब संकट डोले, तब वराह प्रभु रक्षा तोले॥
हे नर रूपी वराह स्वामी, रक्षा करो, रखो निज नामी॥
जो नर श्रद्धा से गुण गावे, वराह कृपा से सुख पावे॥
आरती जो प्रेम से गावे, सकल मनोरथ फल वह पावे॥
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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