Shiv Navratri 2026: उज्जैन महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि पर सजेगा विवाह उत्सव का दरबार, जानें 9 दिनों के दिव्य शृंगार का शेड्यूल

Shiv Navratri 2026: मध्य प्रदेश के उज्जैन महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि में बाबा के विवाह उत्सव का दरबार सजता है. इसके नौ दिन का दिव्य शृंगार न केवल उज्जैन बल्कि पूरे देश के भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है. हर दिन बाबा का नया रूप और भव्य सजावट दर्शकों के लिए अद्भुत अनुभव लेकर आती है. जानिए 9 दिनों के दिव्य श्रृंगार का पूरा शेड्यूल.

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Shiv Navratri 2026: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि का पर्व बेहद धूमधाम से मनाया जाता है. वर्ष 2026 में यह पर्व 15 फरवरी को आएगा. लेकिन इससे ठीक नौ दिन पहले, 6 फरवरी से, मंदिर में शुरू होगा शिव नवरात्रि. इस नौ दिवसीय उत्सव में भगवान महाकाल को हर दिन अलग रूप में सजाया जाएगा. यह परंपरा केवल उज्जैन के ज्योतिर्लिंग में ही देखने को मिलती है, जहां बाबा महाकाल की शादी की तरह पूजा होती है. आइए जानते हैं, 9 दिनों के दिव्य शृंगार का पूरा शेड्यूल.

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पहला दिन: हल्दी-चंदन शृंगार

6 फरवरी को शिव नवरात्रि की शुरुआत होती है. पहले दिन भगवान महाकाल को हल्दी और चंदन से सजाया जाएगा. इस अवसर पर 11 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सस्वर रुद्राभिषेक किया जाता है. बाबा महाकाल का यह शृंगार शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है. भक्त इस दिन विशेष आराधना में भाग लेते हैं.

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दूसरा दिन: राजसी वस्त्र में दूल्हे का रूप

7 फरवरी को बाबा महाकाल को नए और भव्य वस्त्र पहनाए जाएंगे. इस दिन उनका दूल्हा स्वरूप तैयार किया जाता है. राजसी ठाट-बाट के साथ पूजा-अर्चना होती है. मंदिर में भक्तों की उपस्थिति और भजन की धुन माहौल को अत्यंत भक्तिमय बना देती है.

तीसरा दिन: शेषनाग शृंगार

8 फरवरी को महाकाल का रूप ‘शेषनाग श्रृंगार’ में देखा जाएगा. नागों के राजा शेषनाग के साथ सजावट बाबा की अनंत और ब्रह्मांडीय शक्ति को दर्शाती है. भक्त इस दिन विशेष रूप से मंदिर में आकर्षित होते हैं और दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

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चौथा दिन: मुकुट और फलमालाएं

9 फरवरी को बाबा महाकाल को कटरा, मेखला, दुपट्टा और मुकुट पहनाया जाएगा. साथ ही ताजे फलों और मुंडमालाओं से उनका श्रृंगार किया जाएगा. यह रूप भक्तों को अत्यंत मनोहारी लगता है और मंदिर का वातावरण खुशी से भर जाता है.

पांचवां दिन: पीतांबर शृंगार

10 फरवरी को भगवान महाकाल को पीले रंग के वस्त्र पहनाए जाते हैं. पीला रंग हिंदू धर्म में शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है. इस दिन का श्रृंगार खासतौर पर विवाह और धार्मिक अनुष्ठानों के अनुरूप होता है.

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छठा दिन: होलकर रियासत का रूप

11 फरवरी को महाकाल का श्रृंगार होलकर परंपरा के अनुसार किया जाएगा. इसी दिन भगवान चंद्रमौलेश्वर का भी विशेष पूजन और अर्चन होता है. भक्त इस दिन मंदिर में राजसी और पारंपरिक वातावरण का आनंद लेते हैं.

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सातवां दिन: उमा-महेश स्वरूप

12 फरवरी को बाबा महाकाल को भूरे रंग के वस्त्र, मुकुट और फलों के हार से सजाया जाएगा. इस दिन उन्हें ‘उमा-महेश’ रूप में दर्शाया जाता है. उनका अलौकिक सौंदर्य भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है.

आठवां दिन: लाल दूल्हा रूप

13 फरवरी को महाकाल को लाल रंग के भव्य वस्त्र पहनाए जाएंगे. मुकुट और मुंडमाला के साथ उनका यह दूल्हा स्वरूप भक्तों को बेहद आकर्षित करता है. मंदिर में इस दिन उत्सव का माहौल चरम पर होता है.

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नवां दिन: शिव तांडव रूप

14 फरवरी को बाबा महाकाल का शिव तांडव स्वरूप भक्तों के लिए दर्शन में आता है. यह रूप उनकी प्रचंड शक्ति और नृत्य का प्रतीक है. शाम को विवाह की अंतिम तैयारियां पूरी होती हैं.

महाशिवरात्रि: चक्रवर्ती सम्राट रूप

15 फरवरी को महाशिवरात्रि का मुख्य दिन होगा. बाबा महाकाल को चक्रवर्ती सम्राट की भव्य सजावट दी जाएगी. मंदिर के कपाट 44 घंटे तक खुले रहेंगे और पूरे दिन और रात भव्य महापूजा का आयोजन होगा. इस दिन बाबा को ‘सवा मन का सेहरा’ भी चढ़ाया जाएगा.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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