Shardiya Navratri 2026: आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर की सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर हो गई थी. हालांकि, सूर्योदय को महत्व देते हुए. अष्टमी तिथि 19 को मान्य है. आज अष्टमी और नवमी तिथि दोनों एक साथ है. आज दुर्गा अष्टमी और महा नवमी हैं. दोनों तिथियों का व्रत एक साथ है. ऐसे में आज मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की संयुक्त पूजा कर सकते हैं. आइये पूजा विधि, मंत्र और आरती के बारे में जानते हैं.
शारदीय नवरात्रि 2026 अष्टमी-नवमी पूजा विधि
सुबह उठने के बाद स्नान कर साफ वस्त्र पहन लें. इसके बाद आप चौकी स्थापित करें. मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा स्थापित करें. प्रतिमा के समक्ष दीप और धूप जलाएं. देवी मां को अक्षत रोली से तिलक लगाएं. आप अष्टमी नवमी की संयुक्त पूजा में दोनों देवियों की पूजा एक साथ कर सकते हैं. आप मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री के मंत्रों का जाप करें. आप दोनों देवियों को फल और मिठाई का भोग लगा सकते हैं.
मां महागौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया।जय उमा भवानी जय महामाया॥
हरिद्वार कनखल के पासा।महागौरी तेरा वहा निवास॥
चन्द्रकली और ममता अम्बे।जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे॥
भीमा देवी विमला माता।कौशिक देवी जग विख्यता॥
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥
सती (सत) हवन कुंड में था जलाया।उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया।शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता। मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो॥
मां सिद्धिदात्री पूजा मंत्र
- ॐ सिद्धिदात्र्यै नम:
- या देवी सर्वभूतेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
मां सिद्धिदात्री की आरती
जय सिद्धिदात्री मां तू सिद्धि की दाता।तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥
तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥
कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम॥
तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।तू जगदम्बे दाती तू सर्वसिद्धि है॥
रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो॥
तू सब काज उसके करती है पूरे।कभी काम उसके रहे ना अधूरे॥
तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया॥
सर्वसिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली॥
हिमाचल है पर्वत जहाँ वास तेरा।महा नन्दा मन्दिर में है वास तेरा॥
मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता॥
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.