Kanya Pujan 2026: नवरात्रि में किस उम्र की कन्याओं को कराएं भोजन? क्यों जरूरी है एक बालक को शामिल करना

Kanya Pujan 2026: नवरात्रि में व्रत-पूजन के साथ ही अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन किया जाता है. कन्या पूजन में किस उम्र की कन्याओं को भोजन कराना चाहिए. आइये इसके बारे में यहां जानते हैं.

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कन्या पूजन में 9 कन्याओं और एक बालक को भोजन कराना चाहिए. (Photo Credit - AI)

Kanya Pujan 2026: शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ रही है. ऐसे में एक ही दिन दोनों तिथियों का कन्या पूजन किया जाएगा. इस बार महा अष्टमी और महा नवमी तिथि 19 अक्टूबर को है. मां दुर्गा के आशीर्वाद के लिए आप इस दिन कन्या पूजन कर सकते है. कन्या पूजन में एक बालक और नौ कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है. कन्या पूजन में उन्हें भोजन कराने के साथ ही दक्षिणा दी जाती है.

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कन्या पूजन में किस उम्र की बच्चियों को शामिल करें?

नवरात्रि व्रत के दौरान कन्या पूजन में हमेशा 2 साल से लेकर 10 साल तक की बच्चियों को शामिल करना चाहिए. इससे अधिक उम्र की कन्याओं को पूजन में शामिल नहीं करना चाहिए. नौ कन्याओं के साथ ही एक बालक को भोजन कराना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही उम्र की कन्याओं का पूजन करने से ही कन्या पूजन का पूर्ण फल मिलता है. अलग-अलग उम्र की कन्याओं का अलग महत्व होता है.

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कन्याओं की उम्र और देवी का स्वरूप

2 साल की कन्या को कुमारी स्वरूप माना जाता है. 3 साल की कन्या को त्रिमूर्ति का प्रतीक मानते हैं. इसके साथ ही 4 साल की कन्या को कल्याणी और पांच साल की कन्या को रोहिणी का प्रतीक मानते हैं. 6 साल की कन्या को कलिका और सात साल की कन्या को चंडिका का रूप मानते हैं. 8 साल की कन्या को शाम्भवी और 9 साल की कन्या को देवी दुर्गा का रूप मानते हैं. कन्या पूजन में 10 साल की कन्या को सुभद्रा का स्वरूप मानते हैं. इसके साथ ही कन्या पूजन में 2 से 10 साल की उम्र के बालक को शामिल करना चाहिए.

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कन्या पूजन में क्यों शामिल करते हैं एक बालक?

कन्या पूजन में एक बालक को भोजन कराने की परंपरा है. कन्या पूजन में इस बालक को बटुक भैरव का स्वरूप मानते हैं. बटुक भैरव भगवान भैरव के बाल स्वरूप को कहते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भैरव भगवान को मां दुर्गा का द्वारपाल और रक्षक मानते हैं. 9 कन्याओं के साथ ही एक बालक को भोजन कराने के बाद ही कन्या पूजन और नवरात्रि का व्रत पूर्ण माना जाता है. कई लोग कन्या पूजन में एक बालक को हनुमान जी का प्रतीक मानते हैं. इसी कारण से कन्या पूजन में एक बालक को लंगूर कहते हैं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Aman Maheshwari

Aman Maheshwari

अमन माहेश्वरी न्यूज 24 में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह खबरों को समझकर पाठकों तक आसान शब्दों में पहुंचाने का काम बखूबी करते हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन (BJMC) किया है. इसके बाद उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन (MJMC) किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. सबसे पहले जी मीडिया डीएनए हिंदी के साथ जुड़े. पिछले 5 साल से अमन डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं. डीएनए हिंदी में बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट ज्वाइन किया. इसके बाद सब एडिटर के पद पर काम किया. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अमन ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान धार्मिक खबरों को बखूबी कवर किया. धर्म और ज्योतिष - अमन धर्म-ज्योतिष सेक्शन के लिए लिखने के दौरान अंक ज्योतिष, वास्तु, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार से जुड़े विषयों पर लेख तैयार करते हैं. देवी-देवता और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं, मंदिर, तीर्थ, धार्मिक स्थल और धार्मिक परंपराएं से जुड़े लेख लिखते हैं. इसके साथ ही धार्मिक यात्राओं से जुड़े उपयोगी लेख अमन तैयार करते हैं. Email - aman@bagconvergence.in X Account - MrAman0501
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