Sawan Somwar 2026 Today: सावन महीने का आखिरी सोमवार आज है. सावन के आखिरी सोमवार के दिन महादेव की पूजा-अर्चना करें और रुद्राभिषेक करें. शिव भक्तों को सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनने के बाद शिवालय जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करना चाहिए. सोमवार का व्रत करने और महादेव की पूजा से जीवन से कष्टों का अंत कर सकते हैं. आज जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त और सोमवार व्रत कथा के बारे में जानते हैं.

सोमवार व्रत शुभ संयोग

आज अभिजित मुहूर्त में अभिषेक कर सकते हैं. दोपहर को 12 बजे से लेकर 12 बजकर 50 मिनट पर अभिजित मुहूर्त रहेगा. इसके साथ ही प्रीति योग और आयुष्मान योग बन रहा है. आज शाम को प्रदोष काल के समय भी आप महादेव की पूजा और जलाभिषेक कर सकते हैं. प्रदोष काल का समय शाम को 6 बजकर 30 मिनट से लेकर रात को 8 बजकर 30 मिनट के बीच रहेगा. आप इस बीच पूजा कर सकते हैं.

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सावन सोमवार व्रत कथा (Sawan Somwar Vrat Katha)

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक नगर में एक साहूकार रहता था. वह निर्धन था और उसे संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो रही थी. इसके कारण वह परेशान रहता था. साहूकार हर सोमवार का शिव जी की पूजा और व्रत करता था. उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता पार्वती ने शिव जी को कहा कि, आप अपने भक्त की इच्छा पूरी क्यों नहीं करते हैं. तब शिव जी ने कहा कि, इसके भाग्य में पुत्र प्राप्ति का सुख नहीं है. अगर पुत्र होता है, तो वह अल्पायु होगा और 12 वर्ष की उम्र में मर जाएगा.

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साहूकार को हुई पुत्र की प्राप्ति

शिव जी और पार्वती की बात सुनकर साहूकार को दुख नहीं हुआ. साहूकार लगातार शिव जी की भक्ति और सोमवार का व्रत करता रहा. साहूकार की पत्नी गर्भवती हुई और उसे पुत्र की प्राप्ति हुई. वह प्रसन्न नहीं था, क्योंकि, उसे पता था की पुत्र की अल्पायु है. 11 वर्ष की उम्र में अपने साहूकार की पत्नी से साहूकार से पुत्र के विवाह के लिए कहा. साहूकार ने विवाह के लिए मना कर दिया और अपने पुत्र को पढ़ने के लिए काशी भेज दिया.

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साहूकार का पुत्र अपने मामा के साथ काशी के लिए चला गया. रास्ते में एक जगह एक राजकुमारी का विवाह हो रहा था, लेकिन राजकुमार एक आंख से काना था. तब राजकुमार के पिता ने साहूकार के पुत्र से विवाह करा दिया. उसने विवाह के बाद राजकुमारी की चुन्नी पर लिख दिया कि, तुम्हारा विवाह मेरे से हुआ है, लेकिन जिसके साथ तुम्हें जाना है, वह एक आंख से काना है. मैं पढ़ने के लिए काशी जा रहा हूं.

वह काशी चला गया. इसके बाद 12 वर्ष की आयु होने पर उसकी मृत्यु हो गई. तब माता पार्वती और शिव जी वहां से जा रहे थे. बालक के मामा के विलाप की आवाज सुनकर वह रुके. माता पार्वती ने शिव जी से बालक को जीवित होने का वरदान देने के लिए कहा, उन्होंने कहा वरना इसके माता-पिता भी मृत्यु को प्राप्त हो जाएंगे. इसके बाद साहूकार का पुत्र जीवित हो गया. वह अपनी शिक्षा पूरी करके वापस लौट आएं. साहूकार और उसकी पत्नी दोनों भूखे-प्यासे बेटे का इंतजार कर रहे थे. उन दोनों ने प्रण लिया था कि, अगल उन्हें पुत्र की मृत्यु का समाचार मिलेगा, तो वह अपने प्राण त्याग देंगे. सोमवार व्रत के दिन इस व्रत कथा का पाठ अवश्य करें. इसी प्रकार सोमवार का व्रत करने वाले के जीवन से सभी दुखों का अंत होता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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