Pitru Amavasya 2026 Today: आज 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन पितृ पक्ष का समापन हो रहा है. आज पितृ पक्ष का बेहद खास दिन है. आज अमावस्या तिथि पर सभी पूर्वजों का श्राद्ध कर सकते हैं. जिनकी मृत्यु की तिथि का नहीं पता उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है. आज का दिन पितरों को प्रसन्न करने और पितृ दोष से मुक्ति के लिए बहुत ही अच्छा है. आप श्राद्ध कर्म करने के साथ ही पितृ स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं. इसके साथ ही कई मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है.
प्रसन्न होंगे तीन पीढ़ियों के पूर्वज
आज पितृ पक्ष की अमावस्या पर श्राद्ध और उपायों को करने से तीन पीढ़ियों के पूर्वज प्रसन्न होंगे. सर्वपितृ अमावस्या का दिन पितरों को प्रसन्न करने के उपायों को करने के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सर्वपितृ अमावस्या पर तीन पीढ़ियों यानी पिता, दादा और परदादा की आत्मा की शांति और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति के लिए उपायों को कर सकते हैं. आप विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने के साथ ही मंत्रों और स्तोत्र का जाप करें.
पितृ स्तोत्र का पाठ (Pitar Stotra Lyrics in Hindi)
अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् ।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा ।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।।
मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा ।
तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा ।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् ।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।
प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च ।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।
नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु ।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।
सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा ।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।
अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् ।
अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।
ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।
तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:।
नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।
पितृ गायत्री मंत्र (Pitru Gayatri Mantra)
ॐ पितृगणाय विद्महे जगतधारिणी धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात् ॥
पितृ तृप्ति और स्वधा मंत्र
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.