Sarva Pitru Amavasya 2026 Today: आज 10 अक्टूबर 2026 दिन शनिवार को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है. अमावस्या का दिन पितृ पक्ष में सबसे खास होता है. पितृ पक्ष की अमावस्या को पितृ अमावस्या और सर्वपितृ अमावस्या के नाम से जानते हैं. आज सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों का श्राद्ध करने, पिंडदान करने और तर्पण करने का खास महत्व है. आश्विन पितृ पक्ष अमावस्या के साथ ही पितृ पक्ष का समापन हो जाता है. आइये पितृ पक्ष के महत्व और मुहूर्त के बारे में जानते हैं.
पितृ पक्ष अमावस्या का महत्व
आश्विन अमावस्या शनिवार के दिन होने से यह शनिश्चरी अमावस्या होगी. ऐसे में पितरों का तर्पण करने के साथ ही शनि दोष से मुक्ति के उपाय कर सकते हैं. सर्वपितृ अमावस्या पर सभी पितरों का श्राद्ध कर सकते हैं. इस दिन को ज्ञात-अज्ञात पितरों के श्राद्ध के लिए बेहद खास माना जाता है. अगर किसी को पितर की मृत्यु की तिथि का नहीं पता है तो, वह पितृ पक्ष की अमावस्या पर श्राद्ध कर सकता है. इस दिन श्राद्ध कर्म करने के साथ ही पितरों को विदाई दी जाती है.
सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध मुहूर्त
कुतुप मूहूर्त – दोपहर 11 बजे से लेकर 11 बजकर 47 मिनट तक
रौहिण मूहूर्त – दोपहर 11 बजकर 47 मिनट से 12 बजकर34 मिनट तक
अपराह्न काल – दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से 2 बजकर 55 मिनट तक
सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों का श्राद्ध कर्म कुतुप मूहूर्त, रौहिणी मुहूर्त और अपराह्न काल में कर सकते हैं. श्राद्ध कर्म करने के साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराएं. गाय, चीटी, कुत्तों, कौवे और देवता को भोजन कराकर पंचबलि श्राद्ध कर्म करें.
कैसे करें पितरों को विदा?
अमावस्या पर दिन के समय श्राद्ध और तर्पण की क्रिया कर लें. शाम को सूर्यास्त के बाद घर की दक्षिण दिशा में चौमुखी दीपक जलाएं. ऐसा माना जाता है, पूर्वजों के विदा होने पर दीपक से उनके मार्ग में उजाला होता है. पितरों को विदा करने के दौरान कहें कि, हमनें तर्पण, श्राद्ध, पंचबलि कर्म, दान, ब्राह्मण भोज अपने सामर्ध्य के अनुसार किया है. इससे सभी पितृ संतुष्ट हों. इसके साथ ही घर-परिवार में सुख-समृद्धि के लिए कामना करें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.