Premanand Maharaj: कलयुग का समय चल रहा है, जिसमें देवी-देवताओं की पूजा को हर समस्या का समाधान माना गया है. हालांकि, जो लोग रोजाना पूरे विधि-विधान से भगवान की पूजा नहीं कर पाते हैं, वो नाम जाप का सहारा लेते हैं. शास्त्रों में नाम जाप को अत्यंत शक्तिशाली बताया गया है, जिसके प्रभाव से व्यक्ति अधिकतर संकटों से बच सकता है. यहां तक कि प्रसिद्ध संत और आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज भी नाम जाप को सर्वोपरि मानते हैं. उनका कहना है कि नाम जाप के माध्यम से देवी-देवताओं को आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है.
लेकिन कई बार तय संख्या तक नाम जाप करना संभव नहीं हो पाता है. किसी दिन जाप की संख्या अधिक हो जाती है तो किसी दिन बहुत कम रह जाती है. ऐसे में मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि 'अगर एक दिन ज्यादा और दूसरे दिन कम नाम जाप हो तो क्या इससे पाप लगता है?' ये ही सवाल एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा. चलिए जानते हैं, इस विषय पर बाबा ने क्या कहा.
---खबर नीचे जारी है---
क्या कभी कम तो कभी ज्यादा कर सकते हैं नाम जाप?
एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से सवाल किया कि 'किसी दिन मैं बहुत ज्यादा नाम जाप कर लेता हूं, पर कभी भजन में मन ही नहीं लगता है तो क्या इससे पाप लगता है? क्या मैं अपराध कर रहा हूं?' इस सवाल का जवाब देते हुए बाबा ने कहा 'नहीं. ये अपराध नहीं है. नाम जाप की संख्या से ज्यादा भाव महत्वपूर्ण होता है. आप कितने ध्यान और मन से जाप कर रहे हैं वो जरूरी है. नाम जाप का मुख्य उद्देश्य है कि आपका मन शांत रहे और आप गलत चीजों की तरफ न जाएं.'
---खबर नीचे जारी है---
ये भी पढ़ें- मुंह से नाम जाप कर रहे हैं लेकिन मन कहीं और ही है तो क्या इस जप से लाभ होगा? जानें प्रेमानंद महाराज से
---खबर नीचे जारी है---
संख्या से ज्यादा भाव महत्वपूर्ण है
इसी के आगे बाबा कहते हैं 'जब भी आप नाम जाप करें तो उसकी संख्या से ज्यादा अपने भाव पर ध्यान दें. नाम जाप करते समय आपका मन शांत व दिमाग साफ होना चाहिए. इससे ही आपको लाभ होगा.'
---खबर नीचे जारी है---
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
---खबर नीचे जारी है---