Pitra Paksha 2026: आश्विन माह प्रतिपदा तिथि कल देर रात 10 बजकर 18 मिनट पर आरंभ हो गई थी. आज देर रात 10 बजकर 58 मिनट पर प्रतिपदा तिथि का समापन होगा. ऐसे में उदयातिथि को महत्व देते हुए, प्रतिपदा तिथि मान्य होगी. आज 27 सितंबर को प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध है. प्रतिपदा श्राद्ध परिवार के उन मृतक सदस्यों के लिये किया जाता है, जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि पर हुई हो. आज शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है.
पितरों का श्राद्ध और तर्पण
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान पितरों की आत्मा पृथ्वी लोक पर आती हैं. इस दौरान श्राद्ध, तर्पण व दान ग्रहण करके पितृ तृप्त होते हैं. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से पितर प्रसन्न होकर संतान, आयु, धन और जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद देते हैं. पितरों को प्रसन्न करने के लिए दोपहर के समय कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और अपराह्न काल में पितरों का श्राद्ध करें. सुबह और शाम के समय श्राद्ध नहीं करना चाहिए.
प्रतिपदा तिथि के लिए श्राद्ध मुहूर्त
कुतुप मुहूर्त – 11:48 से 12:36
रौहिण मुहूर्त – 12:36 से 13:24
अपराह्न काल – 13:24 से 15:48
आप आज इन तीनों मुहूर्त के दौरान श्राद्ध कर सकते हैं. श्राद्ध करने के लिए कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और अपराह्न काल का समय अच्छा माना जाता है.
श्राद्ध और तर्पण की विधि
दोपहर के समय मुहूर्त के दौरान दक्षिण दिशा में मुख करके आसन लगाकर श्राद्ध कर्म करना चाहिए. पितरों के तर्पण के लिए तांबे के बर्तन में जल, कच्चा दूध, गंगाजल, काले तिल, जौ, फूल और कुश लेकर पितरों को अर्पित करें. पितरों के लिए भोजन तैयार करें. इस भोजन से कुछ हिस्से निकालकर गाय, कुत्ते, कौवे, देवता और चींटी को खिलाएं. इसे पंचबलि के नाम से जाना जाता है. ऐसा करने से यह भोजन सीधे पितरों को प्राप्त होता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.