Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा भारत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु रहे. बीसवीं सदी में उनका प्रभाव बहुत गहरा रहा. उत्तराखंड राज्य में स्थित कैंची धाम आज भी आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है. बाबा का जीवन साधारण रहा, पर उनके विचार बहुत ऊंचे रहे. उनकी बातें सरल भाषा पर आधारित थीं, इसलिए वे आम जीवन पर सीधा असर डालती हैं. आज भी लाखों लोग उनकी सीख से प्रेरणा लेते हैं. आइए जानते हैं, नीम करोली बाबा के 5 वैसे उपदेश, जिनसे घर-परिवार हमेशा खुशहाल रहता है.
प्रेम को जीवन का आधार बनाएं
नीम करोली बाबा प्रेम को सबसे बड़ा साधन मानते थे. उनका विश्वास था कि कठिन परिस्थितियों का हल भी प्रेम से निकल सकता है. प्रेम का भाव मन को शांत करता है. परिवार पर इसका सीधा असर पड़ता है. जब घर में प्रेम का वातावरण रहता है, तब तनाव अपने आप कम होता जाता है.
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करुणा से मजबूत होते हैं रिश्ते
बाबा करुणा को आत्मिक शक्ति मानते थे. किसी की पीड़ा समझना और सहानुभूति दिखाना बहुत जरूरी बताया गया है. करुणा से व्यक्ति का मन विशाल बनता है. इससे घर में आपसी समझ बढ़ती है. रिश्तों में भरोसा कायम रहता है.
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निस्वार्थ सेवा देलता है आंतरिक सुख
नीम करोली बाबा सेवा को साधना मानते थे. उनका कथन था कि बिना अपेक्षा के की गई सेवा जीवन को अर्थ देती है. सेवा कई रूपों में हो सकती है. घर, समाज या जरूरतमंद व्यक्ति के लिए किया गया छोटा कार्य भी सेवा बन जाता है. ऐसा करने से मन हल्का और संतुलित रहता है.
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सत्य का साथ न छोड़ें
बाबा सत्य के मार्ग को जीवन का सुरक्षित रास्ता मानते थे. सत्य से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है. झूठ और दिखावा मन पर बोझ डालते हैं. सत्य का पालन करने वाला व्यक्ति सरल निर्णय ले पाता है. परिवार पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
ईश्वर पर भरोसा बनाए रखें
नीम करोली बाबा ईश्वर पर पूर्ण भरोसा रखने की सीख देते थे. उनका मानना था कि हर घटना के पीछे एक कारण होता है. कठिन समय में धैर्य रखना जरूरी होता है. भरोसा रखने से भय कम होता है. मन स्थिर बना रहता है.
संतोष और सादगी अपनाएं
बाबा का जीवन सादगी का उदाहरण रहा. सीमित साधनों में भी संतोष रखने की सीख दी गई. अनावश्यक इच्छाएं तनाव बढ़ाती हैं. सादा जीवन मन को शांति देता है. संतोष से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
हनुमान भक्ति से बढ़ता है आत्मबल
नीम करोली बाबा हनुमान जी के परम भक्त रहे. हनुमान भक्ति को शक्ति और सेवा का मार्ग माना गया है. इससे साहस और अनुशासन का विकास होता है. नियमित स्मरण से आत्मबल मजबूत होता है. यही आत्मबल जीवन को संतुलन प्रदान करता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.