Navratri Rituals: प्रत्यक्ष नवरात्रि हो या गुप्त नवरात्रि, शारदीय हो या चैत्र नवरात्रि, कलश स्थापना के साथ ‘जौ’ बोने की परंपरा सदियों पुरानी है . हिंदू धर्म में जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि सृष्टि की पहली फसल और ब्रह्मा जी का स्वरूप माना गया है . मिट्टी के पात्र में जब ‘सप्तधान्य’ के बीच गंगाजल युक्त कलश स्थापित किया जाता है, तो इन नौ दिनों में जौ का उगना महज एक प्राकृतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि माता रानी के आशीर्वाद और आने वाले समय का सूचक होता है .
क्यों खास है नवरात्रि में जौ बोना?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब सृष्टि की रचना हुई थी, तब सबसे पहले जो फसल उगी थी, वह ‘जौ’ ही थी . इसीलिए इसे ‘पूर्ण धान्य’ कहा जाता है . नवरात्रि के दौरान मिट्टी के पात्र में सप्तधान्य (जौ) बोने का अर्थ है कि हम अपनी सुख-समृद्धि की प्रार्थना माता अन्नपूर्णा से कर रहे हैं . इन अंकुरों को ‘जयंती’ या ‘जंत्री’ कहा जाता है . मान्यता है कि बिना जौ बोए नवरात्रि की पूजा अधूरी रहती है, क्योंकि यह हमारे जीवन की प्रगति और खुशहाली का प्रतीक है .
सप्तधान्य का अर्थ और महत्व
कलश स्थापना में अक्सर ‘सप्तधान्य’ यानी सात प्रकार के अनाजों का प्रयोग होता है, जिनमें जौ सबसे प्रमुख है . इन सात अनाजों में जौं, चावल, तिल, कंगनी, मूंग, चना और गेहूं शामिल होते हैं . ये सात धान्य पृथ्वी की उर्वरता और हमारे जीवन की बुनियादी जरूरतों को दर्शाते हैं . मिट्टी के पात्र में इन्हें बोकर बीच में कलश रखने का अर्थ है कि हमारा जीवन जल (कलश) और अन्न (जौ) से हमेशा भरा रहे .
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अंकुरों का रंग और शकुन-अपशकुन
जौ के उगने की गति और उसके रंग को लेकर ज्योतिष शास्त्र में कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं . यदि जौ तेजी से बढ़ते हैं, तो इसे बहुत शुभ माना जाता है . इसका अर्थ है कि घर में उन्नति होगी .
सफेद या हरा रंग: यदि जौ के ऊपर का हिस्सा हरा हो और नीचे का हिस्सा सफेद हो, तो यह संकेत देता है कि साल की शुरुआत अच्छी होगी और अंत में बहुत बड़ा लाभ मिलेगा .
पूरा हरा रंग: यदि जौ पूरी तरह से गहरे हरे रंग के और घने उगते हैं, तो यह पूरे वर्ष सुख-शांति और आर्थिक मजबूती का प्रतीक है .
पीला या काला रंग: यदि जौ का रंग पीला पड़ जाए या वे काले होकर सूखने लगें, तो इसे आने वाली किसी परेशानी या बीमारी का संकेत माना जाता है . ऐसे में माता से क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए .
टेढ़ी या धीमी वृद्धि के मायने
कई बार जौ बहुत धीरे उगते हैं या एक तरफ झुक जाते हैं . ज्योतिष के अनुसार, धीमी वृद्धि यह दर्शाती है कि आपको अपने लक्ष्यों को पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी . यदि अंकुर टेढ़े-मेढ़े उग रहे हैं, तो यह मानसिक तनाव या कार्यों में रुकावट का इशारा हो सकता है . नवरात्रि की अष्टमी या नवमी को इन अंकुरों का पूजन किया जाता है और फिर इन्हें पवित्र नदी में विसर्जित किया जाता है .
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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