Mohini Ekadashi 2026 Today: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी का दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए बेहद खास होता है. आज 27 अप्रैल को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जा रहा है. मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा मिलती है. इस दिन विधि-विधान से साथ पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है. जीवन में सुख-समृद्धि के लिए मोहिनी एकादशी का व्रत करना चाहिए.
मोहिनी एकादशी व्रत शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:17 से 05:01
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 04:39 से 05:44
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:53 से दोपहर 12:45
विजय मुहूर्त- दोपहर में 02:31 से 03:23
गोधूलि मुहूर्त- शाम में 06:53 से 07:14
सायाह्न सन्ध्या- शाम में 06:54 से 07:59
शुभ चौघड़िया- सुबह 09:02 से 10:40
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मोहिनी एकादशी पूजा विधि
भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए मोहिनी एकादशी के दिन सुबह स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. घर के पूजा स्थल की सफाई कर चौकी स्थापित करें. चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. भगवान को फूल, तुलसी दल, रोली, अक्षत अर्पित करें. विष्णु भगवान के समक्ष दीपक जलाएं. फल और मिठाई का भोग लगाएं. विष्णु भगवान के मंत्रों का जाप करें और आरती कर पूजा संपन्न करें. व्रत के दिन सात्विक भोजन करें. व्रत का पारण अगले दिन 28 अप्रैल को करें.
विष्णु भगवान जी पूजा मंत्र
- ॐ विष्णवे नम:
- ॐ नारायणाय नम:
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय:
- ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् || - ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
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विष्णु भगवान की आरती
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे।
भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥
जो ध्यावै फल पावै, दुख बिनसे मन का।
सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय॥
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं किसकी।
तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय॥
तुम पूरन परमात्मा, तुम अंतरयामी॥
पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय॥
तुम करुणा के सागर तुम पालनकर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय॥
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय॥
दीनबंधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय॥
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय॥
तन-मन-धन और संपत्ति, सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय॥
नारायणजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय॥
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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