निशिता काल में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है. आज महाशिवरात्रि के अवसर पर निशिता काल का समय रात को 12 बजकर 9 मिनट से लेकर देर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा. शिव भक्त इस समय पूजा-अर्चना कर सकते हैं. निशिता काल में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करें. इसके साथ ही शिव मंत्रों का जाप करें.
श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम्
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय,
भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय,
तस्मै न काराय नमः शिवाय॥
मन्दाकिनी सलिलचन्दन चर्चिताय,
नन्दीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय ।
मन्दारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय,
तस्मै म काराय नमः शिवाय॥
शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द,
सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।
श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय,
तस्मै शि काराय नमः शिवाय॥
वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य,
मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय,
तस्मै व काराय नमः शिवाय॥
यक्षस्वरूपाय जटाधराय,
पिनाकहस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय,
तस्मै य काराय नमः शिवाय॥
पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥
शिवलिंग पर जल अर्पित करना मन की तपन और जीवन की कठिनाइयों को शांत करने का प्रतीक माना जाता है. जिस प्रकार जल अग्नि को शांत करता है, उसी प्रकार शिव जी को जलाभिषेक जीवन के कष्टों को शीतल करता है. महाशिवरात्रि की रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है. आप रात्रि प्रहर के समय में जलाभिषेक करें इससे शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
महाशिवरात्रि व्रत पर आप रात को फलाहार कर सकते हैं. इसके बाद महाशिवरात्रि व्रत का पारण 16 फरवरी 2026, दिन सोमवार को सुबह 6 बजकर 42 मिनट के बाद कर सकते हैं. व्रत पारण का समय सुबह 6 बजकर 42 मिनट से दोपहर 3 बजकर 10 मिनट तक किया रहेगा. आप इस दौरान महाशिवरात्रि व्रत का पारण कर सकते हैं.
महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. फाल्गुन की कृष्ण पक्ष चतुदर्शी तिथि 16 फरवरी की शाम को 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी. यह तिथि 16 फरवरी को समाप्त होगी.
महाशिवरात्रि व्रत के दौरान सात्विक भोजन करना चाहिए. अब शाम के समय व्रत में साबूदाने की खीर, कुट्टू के आटे की पूरी, सिंघाड़े के आटे की पूरी, समा के चावल, शकरकंद, लौकी का हलवा, कद्दू की सब्जी, दही, आलू और मखाने की खीर इन सभी चीजों में से कुछ भी खा सकते हैं. आपको व्रत के भोजन के लिए खास ध्यान रखना चाहिए कि, इसमें लहसुन, प्याज और सादा नमक का इस्तेमाल न करें. खाने में सेंधा नमक और काली मिर्च का इस्तेमाल ही करें.
महाशिवरात्रि के पर्व पर रात के समय पूजा करने का खास महत्व होता है. भगवान शिव की पूजा के लिए निशिता काल का मुहूर्त बेहद अच्छा माना जाता है. यह मुहूर्त रात को प्राप्त हो रहा है. ऐसी मान्यता है कि, निशिता काल में पूजा, मंत्र जाप और ध्यान का लाभ कई गुना बढ़ जाता है. इस समय पूजा करने से मन को शांति और आत्मिक बल मिलता है. आज देर रात 12 बजकर 09 मिनट से रात 01 बजकर 01 मिनट तक यह मुहूर्त रहेगा. इस समय आप महादेव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं.
आज रविवार को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है. सुबह से श्रद्धालु जल चढ़ाने के लिए शिवालय पहुंच रहे हैं. कई बड़े मंदिरों के बाहर भक्तों की लंबी लाइन लगी हुई हैं. भारत के साथ ही नेपाल में भी महादेव की भक्ति देखने को मिल रही है. नेपाल के काठमांडू में स्थिति पशुपतिनाथ मंदिर में हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे.
आज महाशिवरात्रि के पर्व पर कई बड़े नेताओं में महाशिवरात्रि की बधाई दी और पूजा-अर्चना की. महाशिवारत्रि के पर्व पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पूजा-अर्चना की. उन्होंने वीडियो साझा करते हुए लिखा कि, महाशिवरात्रि के अवसर पर मैं सभी को दिल से बधाई देता हूं. हर हर महादेव!
झारखंड के देवघर में स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में एक बाबा बैद्यनाथ धाम में महाशिवरात्रि के मौके पर प्राचीन अनूठी परंपरा को निभाया गया. इस परंपरा के तहत बाबा बैद्यनाथ मंदिर के मुख्य शिखर पर मोर मुकुट बांधा जाता है. यह एक प्राचीन और अनूठी परंपरा है. यह रस्म दूल्हे के रूप में भगवान शिव को बारात से पहले उनके विशेष श्रृंगार को दर्शाती है.
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लग रहे माघ मेले का आज आखिरी दिन है. माघ मेले के आखिरी स्नान पर्व पर आज श्रद्धालु भारी संख्या में स्नान के लिए पहुंच रहे हैं. त्रिवेणी संगम पर भक्त आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. बता दें कि, आज महाशिवरात्रि के स्नान के साथ ही माघ मेले का समापन हो जाएगा.
महाशिवरात्रि के पर्व पर भक्त शिवलिंग पर जल के साथ ही बेलपत्र अर्पित करते हैं लेकिन इस दिन अक्सर बाजार में बेलपत्र की कमी हो जाती है. खासकर दोपहर के समय तक बेलपत्र मिलना मुश्किल हो जाता है. आप शाम के समय शिवलिंग पर जल अर्पित कर रहे हैं और बेलपत्र नहीं मिल रहा है तो आप शिवलिंग पर चढ़ा हुआ बेलपत्र साफ करके इस्तेमाल कर सकते हैं. शिवलिंग पर चढ़े हुए बेलपत्र को साफ करें इससे बेलपत्र शुद्ध हो जाता है. इसे पुनः शिव जी पर अर्पित करें.
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम् ॥1॥
परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥
वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।
हिमालये तु केदारं ध्रुष्णेशं च शिवालये ॥3॥
एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति ॥4॥
आशुतोष शशाँक शेखर, चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू, कोटि नमन दिगम्बरा॥
निर्विकार ओमकार अविनाशी, तुम्ही देवाधि देव,
जगत सर्जक प्रलय करता, शिवम सत्यम सुंदरा॥
निरंकार स्वरूप कालेश्वर, महा योगीश्वरा,
दयानिधि दानिश्वर जय, जटाधार अभयंकरा॥
शूल पानी त्रिशूल धारी, औगड़ी बाघम्बरी,
जय महेश त्रिलोचनाय, विश्वनाथ विशम्भरा॥
नाथ नागेश्वर हरो हर, पाप साप अभिशाप तम,
महादेव महान भोले, सदा शिव शिव संकरा॥
जगत पति अनुरकती भक्ति, सदैव तेरे चरण हो,
क्षमा हो अपराध सब, जय जयति जगदीश्वरा ॥
जनम जीवन जगत का, संताप ताप मिटे सभी,
ओम नमः शिवाय मन, जपता रहे पञ्चाक्षरा॥
आशुतोष शशाँक शेखर, चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू, कोटि नमन दिगम्बरा॥
कोटि नमन दिगम्बरा……
ॐ नम: शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च
मयस्कराय च नम: शिवाय च शिवतराय च॥
ईशानः सर्वविद्यानामीश्व रः सर्वभूतानां ब्रह्माधिपतिर्ब्रह्मणोऽधिपति
ब्रह्मा शिवो मे अस्तु सदाशिवोय्॥
तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
अघोरेभ्योथघोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः सर्वेभ्यः सर्व सर्वेभ्यो नमस्ते अस्तु रुद्ररुपेभ्यः॥
वामदेवाय नमो ज्येष्ठारय नमः श्रेष्ठारय नमो
रुद्राय नमः कालाय नम: कलविकरणाय नमो
बलविकरणाय नमः बलाय नमो
बलप्रमथनाथाय नमः सर्वभूतदमनाय नमो मनोन्मनाय नमः॥
सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः।
भवे भवे नाति भवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः॥
नम: सायं नम: प्रातर्नमो रात्र्या नमो दिवा।
भवाय च शर्वाय चाभाभ्यामकरं नम:॥
यस्य नि:श्र्वसितं वेदा यो वेदेभ्योsखिलं जगत्।
निर्ममे तमहं वन्दे विद्यातीर्थ महेश्वरम्॥
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिबर्धनम् उर्वारूकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात्॥
सर्वो वै रुद्रास्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु।
पुरुषो वै रुद्र: सन्महो नमो नम:॥
विश्वा भूतं भुवनं चित्रं बहुधा जातं जायामानं च यत्।
सर्वो ह्येष रुद्रस्तस्मै रुद्राय नमो अस्तु॥
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महाशिवरात्रि के पावन दिन मध्य प्रदेश के वनखंडी महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की. साथ ही देशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज महाशिवरात्रि के अवसर पर उधम सिंह नगर स्थित चकरपुर वनखंडी महादेव मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और जलाभिषेक किया.
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता इस समय राजस्थान के दौरे पर हैं. इस बीच उन्होंने आज महाशिवरात्रि के पावन दिन श्रीनाथजी मंदिर में दर्शन किए और पूजा-अर्चना की.
आज महाशिवरात्रि के पावन दिन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक विधि-विधान से भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया.
Maha Shivratri 2026 Date, Time, Shubh Muhurat: सनातन धर्म के लोगों के लिए महाशिवरात्रि के पर्व का महत्व होता है, जिसे शिव-शक्ति के मिलन के रूप में मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर शिव जी और माता पार्वती का विवाह हुआ था. साथ ही भगवान शिव ने शिवलिंग के रूप में पहली बार भक्तों को दर्शन दिए थे. इसके अलावा भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए विष पिया था, जिससे उनकी कंठ नीली हो गई थी. इसी वजह से शिव जी को नीलकंठ नाम से जाना जाता है.
ऐसे में इस पावन दिन शिव जी और माता पार्वती की पूजा की जाती है. इसी के साथ व्रत और शिवलिंग पर जल चढ़ाके महादेव को खुश करने का प्रयास किया जाता है. द्रिक पंचांग के मुताबिक, इस बार आज 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जा रहा है.
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Mahashivratri 2026 Shubh Muhurat: महाशिवरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त
- रात्रि प्रथम प्रहर की पूजा का समय- शाम 06:11 से रात 09:23 मिनट (16 फरवरी 2026)
- रात्रि द्वितीय प्रहर की पूजा का समय- रात 09:23 से सुबह 12:35 मिनट (16 फरवरी 2026)
- रात्रि तृतीय प्रहर की पूजा का समय - सुबह में 12:35 से 03:47 मिनट (16 फरवरी 2026)
- रात्रि चतुर्थ प्रहर की पूजा का समय - सुबह में 03:47 से 06:59 मिनट (16 फरवरी 2026)
- निशिता काल- सुबह में 12:09 से 01:01 मिनट (16 फरवरी 2026)
Mahashivratri 2026 Jal Chadhaane Ka Samay: आज शिवलिंग पर किस समय जल चढ़ाएं?
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर सूर्योदय से पहले जल चढ़ाना शुभ होता है. आज सुबह 7 बजे के आसपास सूर्योदय होगा, जिससे पहले शिवलिंग पर जल चढ़ा सकते हैं. यदि किसी कारण से इस समय शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ा पाएंगे तो सुबह 11 बजे तक भी पूजा कर सकते हैं.
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