हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Nana PatekarGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

Maa Kalyaneshwari Mandir: यहां अदृश्य गुफा में रहती हैं मां कल्याणेश्वरी, संतान प्राप्ति की कामना लेकर मंदिर आते हैं श्रद्धालु, जानें कैसे पहुंचे यहां

Maa Kalyaneshwari Mandir: पश्चिम बंगाल में मैथन के पास स्थित मां कल्याणेश्वरी मंदिर करीब 1200 साल पुराना माना जाता है. यहां मूर्ति नहीं, पवित्र शिला की पूजा होती है. मान्यता है कि इसके नीचे अदृश्य गुफा है. मां का आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालु यहां संतान प्राप्ति और मनोकामना लेकर आते हैं. पढ़िए अमर देव पासवान की यह रिपोर्ट…

विज्ञापन

Maa Kalyaneshwari Mandir: पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धवान जिले में मैथन बांध के निकट बराकर नदी के तट पर स्थित मां कल्याणेश्वरी मंदिर पूर्वी भारत के प्रमुख शक्ति उपासना स्थलों में से एक माना जाता है. करीब 1200 वर्ष पुराने इस मंदिर के प्रति भक्तों की गहरी आस्था है. यहां हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं. खास बात यह है कि इस मंदिर में किसी देवी-देवता की मूर्ति नहीं, बल्कि एक पवित्र शिला की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस शिला के नीचे एक अदृश्य गुफा है और इसके एक छोटे से छिद्र को स्पर्श करने से मां का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

कापालिक साधना से जुड़ा है इतिहास

लोकमान्यताओं के अनुसार, 12वीं शताब्दी में कापालिक साधक देवदास चट्टोपाध्याय मां काली की साधना के लिए इस क्षेत्र के घने जंगल में आए थे. उस समय यह पूरा इलाका जंगलों से घिरा हुआ था. कहा जाता है कि बंगाल के राजा बल्लाल सेन इस कापालिक के भक्त थे. उनकी सलाह पर राजा ने वर्तमान शबनपुर (श्रवणपुर) में देवी श्यामारूपा का मंदिर बनवाया. बाद में जब वहां जनसंख्या बढ़ने लगी, तो देवी ने वर्तमान कल्याणेश्वरी स्थान पर निवास किया और तभी से यहां उनकी पूजा होने लगी. स्थानीय मान्यता के अनुसार ‘मैथन’ नाम भी ‘माई का थान’ से निकला है.

बिना मूर्ति के होती है मां की पूजा

मां कल्याणेश्वरी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां किसी प्रतिमा की पूजा नहीं होती है. मंदिर में स्थापित एक विशाल पत्थर ही मां का स्वरूप माना जाता है. पत्थर के एक कोने में बने छोटे से छिद्र को श्रद्धालु स्पर्श करते हैं और इसे मां का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम मानते हैं. सदियों से यही परंपरा चली आ रही है.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: Surya Arghya Benefits: सुबह-सुबह सूर्य को जल का अर्घ्य देना क्यों है इतना शुभ? जानें धार्मिक महत्व और जल चढ़ाने का सही तरीका

राजा कल्याणीप्रसाद की कथा

एक अन्य जनश्रुति के अनुसार, बंगाल के राजा बल्लाल सेन की पालिता पुत्री लक्ष्मी का विवाह काशीपुर के राजा कल्याणीप्रसाद से हुआ था. विवाह के समय देवी श्यामारूपा की प्रतिमा उन्हें भेंट की गई. लौटते समय जंगल में रास्ता भटक जाने के कारण प्रतिमा को एक स्थान पर रखा गया. अगले दिन जब उसे वापस ले जाने का प्रयास किया गया तो प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली. इसे देवी की इच्छा मानते हुए उसी स्थान पर मंदिर की स्थापना की गई और राजा कल्याणीप्रसाद के नाम पर देवी का नाम मां कल्याणेश्वरी पड़ा.

विज्ञापन

रहस्यमयी नववधू और शंखारी की कहानी

इस मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध जनश्रुतियों में एक रहस्यमयी नववधू की कथा है. कहा जाता है कि एक दिन नदी घाट पर एक नववधू शंख पहनने आई. पैसे मांगने पर उसने शंख बेचने वाले से कहा कि वह शबनपुर जाकर उसके पिता देवनाथ चट्टोपाध्याय से पैसे ले ले.

जब शंखारी वहां पहुंचा तो देवनाथ चट्टोपाध्याय ने बताया कि उनकी कोई संतान ही नहीं है. दोनों जब नदी घाट पर पहुंचे तो वहां कोई नववधू नहीं मिली. केवल एक पत्थर पर युवती के पैरों के निशान दिखाई दिए. इसे मां का चमत्कार मानते हुए वहीं मंदिर की स्थापना की गई और देवनाथ चट्टोपाध्याय पहले सेवायत बने.

विज्ञापन

संतान प्राप्ति की आस्था

मां कल्याणेश्वरी के दरबार में सबसे अधिक श्रद्धालु संतान प्राप्ति की कामना लेकर आते हैं. स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा और मनौती करने पर निःसंतान दंपतियों की इच्छा पूरी होती है. इसी विश्वास के कारण पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार सहित देश के कई राज्यों से भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

यह भी पढ़ें: Milk Spilling Meaning: दूध का बार-बार गिरना महज लापरवाही है या संकट का संकेत? जानें ज्योतिष का रहस्य

विज्ञापन

मंगलवार-शनिवार को उमड़ती है भीड़

मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है. इसके अलावा काली पूजा और दुर्गा पूजा के अवसर पर यहां भव्य धार्मिक आयोजन होते हैं और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं.

कैसे पहुंचे मां कल्याणेश्वरी मंदिर?

मां कल्याणेश्वरी मंदिर पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धवान जिले में मैथन बांध के पास बराकर नदी के तट पर स्थित है. इस मंदिर तक पहुंचने के लिए ट्रेन से बराकर रेलवे स्टेशन, जो यहां से करीब 5 किमी है या आसनसोल जंक्शन, जो यहां से करीब 20 किमी है, तक आ सकते हैं. यहां से टैक्सी, ऑटो और स्थानीय बस आसानी से मिल जाती हैं. सड़क मार्ग से भी यह मंदिर नेशनल हाईवे NH-19, जिसे पुराना NH-2 भी कहते हैं, के जरिए कोलकाता, आसनसोल और धनबाद से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.

विज्ञापन

यह भी पढ़ें: Zodiac Personality Traits: मीठी छुरी होते हैं इन 3 राशियों के लोग, बातों से जीतेंगे दिल; पीठ पीछे चलेंगे चाल

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola