Last Supermoon 2025 Date: सुपरमून एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जब पूर्णिमा की रात चंद्रमा सामान्य दिनों की तुलना में बड़ा और अधिक चमकीला दिखाई देता है. चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा अंडाकार कक्षा में करता है, और इसी कारण कभी वह पास आता है, तो कभी दूर चला जाता है. चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, तो उसे पेरिजी (Perigee) कहते हैं. जब पूर्णिमा की तिथि उसी समय आती है जब चंद्रमा पृथ्वी से सबसे करीब होता है, तो उस विशेष पूर्णिमा को ‘सुपरमून’ (Supermoon) कहा जाता है.
आसान भाषा में कहें तो सुपरमून का मतलब है पूर्णिमा के दिन चंद्रमा का पृथ्वी से सबसे करीब होना. दिसंबर 2025 का सुपरमून इस साल का अंतिम और बेहद खास चंद्र-दर्शन होने वाला है. आइए जानते हैं, क्यों खास सुपरमून और दिसंबर 2025 में सुपरमून कब है?
इस दिन चंद्रमा दिखता है सबसे चमकीला
जब चंद्रमा पृथ्वी के बेहद करीब आता है, तो वह सामान्य पूर्णिमा की तुलना में लगभग 14% बड़ा नजर आ सकता है. इसके साथ ही उसकी चमक भी बढ़ जाती है. खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, सुपरमून की रात चंद्रमा अपनी सामान्य चमक से लगभग 30% अधिक तेज दिखाई देता है. उज्ज्वल, विशाल और बेहद आकर्षक, यह दृश्य आंखों को मंत्रमुग्ध कर देता है. यही वजह है कि सुपरमून खगोल प्रेमियों के लिए एक शानदार अवसर होता है, जब वे चांद की सतह के क्रेटर और पैटर्न को साफ-साफ देख और कैमरे में कैद कर सकते हैं.
समुद्र पर सुपरमून का असर
सुपरमून केवल देखने में ही खास नहीं होता, बल्कि इसका पृथ्वी के प्राकृतिक और मौसम तंत्र पर भी असर पड़ता है. जब चंद्रमा पृथ्वी के अधिक नजदीक होता है, तो उसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति समुद्र पर ज्यादा प्रभाव डालती है. इस दौरान हाई टाइड यानी उच्च ज्वार ज्यादा ऊंचे उठते हैं और लो टाइड यानी नीचे ज्वार और अधिक नीचे चले जाते हैं. इन ज्वारों को पेरिजियन स्प्रिंग टाइड्स (Perigean Spring Tides) कहा जाता है. समुद्र किनारे बसे इलाकों के लिए यह प्राकृतिक घटना काफी महत्वपूर्ण होती है.
दिसंबर 2025 में कब है सुपरमून?
साल 2025 का आखिरी सुपरमून 4 दिसंबर 2025 को दिखाई देगा. यह दिन खास कारणों से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह 2025 की आखिरी पूर्णिमा है और यह इस साल का तीसरा और अंतिम सुपरमून है. यह पूर्णिमा हिंदू धर्म के अनुसार मार्गशीर्ष (अगहन) मास में पड़ती है. यह मास भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित माना गया है. अगर आप चांद देखने के शौकीन हैं, तो यह तारीख आपके लिए बेहद खास होने वाली है.
2025 का यह सुपरमून क्यों है इतना खास?
दिसंबर के इस सुपरमून में एक और अनोखी खगोलीय विशेषता है. बताया जा रहा है कि 4 दिसंबर, 2025 को चंद्रमा आकाश में वर्ष की सबसे अधिक ऊंचाई पर दिखाई देगा. इतनी ऊंचाई पर दिखाई देने वाला चंद्रमा दुबारा साल 2042 से पहले नहीं दिखेगा. इसलिए यह नजारा बेहद दुर्लभ और यादगार माना जा रहा है. इसके साथ ही, यह 2025 का अंतिम सुपरमून है. इसके बाद अगला सुपरमून नवंबर 2026 में देखने को मिलेगा.
‘कोल्ड मून’ भी कहते हैं इसे
दिसंबर में दिखाई देने वाली पूर्णिमा को दुनिया भर में ‘कोल्ड मून’ (Cold Moon) के नाम से जाना जाता है. इसका कारण यह है कि दिसंबर का महीना उत्तरी गोलार्ध में अत्यधिक ठंड की शुरुआत का समय होता है. इसी सर्द मौसम को दर्शाने के लिए प्राचीन मूल अमेरिकी मोहॉक जनजाति ने इसे ‘कोल्ड मून नाम दिया था.
इसके अलावा इसका एक और नाम मिलता है- लॉन्ग नाइट मून (Long Night Moon), क्योंकि यह पूर्णिमा अक्सर शीतकालीन संक्रांति के आसपास पड़ती है. इस समय वर्ष की सबसे लंबी रात होती है, इसलिए इस पूर्णिमा को “लॉन्ग नाइट मून” कहा जाता है.
सुपरमून का ज्योतिष महत्व
भारत समेत कई अन्य देशों में पूर्णिमा सदियों से धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी गई है. जब यह पूर्णिमा सुपरमून का रूप लेती है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. ज्योतिष के अनुसार, सुपरमून भावनाओं और मनःस्थिति पर गहरा प्रभाव डालता है. यह अंतर्ज्ञान, रचनात्मकता और मानसिक ऊर्जा को प्रबल करता है. वहीं, इसे नए कार्यों की शुरुआत और लक्ष्य निर्धारित करने के लिए शुभ समय माना गया है. आर्थिक उन्नति और वेतन वृद्धि के योग भी प्रबल होते हैं.
लेकिन इसके विपरीत, जिनकी कुंडली में चंद्रमा दूषित माना जाता है, उनके लिए यह समय मानसिक उतार-चढ़ाव, भावनात्मक तनाव या विवाद बढ़ा सकता है. इसलिए ज्योतिषीय रूप से यह समय संवेदनशील लेकिन शक्तिशाली माना गया है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।