Kedarnath Story: उत्तराखंड में स्थित केदारनाथ धाम मंदिर शिव भक्तों के बीच बेहद प्रसिद्ध है. यह मंदिर उत्तराखंड की चारधाम में से एक है. केदारनाथ धाम में भगवान शिव की पीठ की पूजा की जाती है. इस मंदिर में महादेव का पूर्ण स्वरूप नहीं है. केदारनाथ में बैल रूपी शरीर का पिछला हिस्सा यानी पीठ के रूप में शिव जी के दर्शन होते हैं. केदारनाथ में भगवान शिव की पीठ के रूप में पूजा होती है ऐसे में उनका सिर कहां है यह सवाल उठता है. इस मंदिर को लेकर सदियों पुरानी मान्यता है चलिए इसके जरिए मंदिर के रहस्य के बारे में जानते हैं.
पांडवों ने बनवाया था केदारनाथ मंदिर
महाभारत युद्ध के बाद पांडव रिश्तेदारों की मृत्यु से दुखी होकर पाप से मुक्ति के लिए शिव की खोज में निकल पड़े थे. शिव जी पांडवों से मिलने के लिए इच्छुक नहीं थे. ऐसे में वह उनसे छिप रहे थे. भगवान शिव ने खुद को बैल रूप में हिमालय में छिपा लिया था. पांडव शिव जी की खोज में हिमालय पहुंच गए. वहां पर भीम को एक बैल दिखा जो सामान्य से अलग था. उन्होंने बैल को पकड़ने की कोशिश की तभी बैल धरती में समाने लगा. भीम ने बैल की पीठ का हिस्सा पकड़ लिया जिसे आज केदारनाथ धाम में पूजा जाता है.
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कहां मौजूद है महादेव का सिर?
भगवान शिव के बैल रूप की पीठ की पूजा केदारनाथ में की जाती है. महादेव का सिर नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में है. महादेव का सिर काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में प्रकट हुआ था. इस प्रकार केदारनाथ धाम में शिव के बैल रूप की पीठ और पशुपतिनाथ मंदिर में उनके सिर की पूजा होती है.
इन सभी के अलावा पंच केदार मंदिर की मान्यता है. इन मंदिरों में भगवान शिव के अंगों की पूजा की जाती है. पंच केदार में एक केदारनाथ धाम है. अन्य चार में तुंगनाथ मंदिर है. तुंगनाथ में भगवान शिव की भुजाओं की पूजा होती है. रुद्रनाथ मंदिर में मुख की पूजा होती है. मध्यमहेश्वर में नाभि की पूजा होती है. कल्पेश्वर मंदिर में जटाएं पूजी जाती हैं.
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पशुपतिनाथ मंदिर, काठमांडू
नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में महादेव के सिर की पूजा होती है. यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस मंदिर में दर्शन से भक्तों को पशु योनि से मुक्ति मिलती है. इस मंदिर का केदारनाथ मंदिर से संबंध है. ऐसे में केदारनाथ मंदिर में दर्शन के बाद पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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