Karwa Chauth Vrat Katha in Hindi: करवा चौथ व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही खास होता है. महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं. करवा चौथ पर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और चंद्रदेव की पूजा करने की परंपरा है. इस दिन करवा माता की पूजा का भी विधान है. करवा चौथ का व्रत शाम को पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा होता है. करवा चौथ के दिन व्रत कथा का पाठ करना भी बेहद जरूरी होता है.
कब है करवा चौथ?
करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. 29 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा. करवा चौथ व्रत पर महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करके व्रत शुरू करती हैं. इसके बाद रात में चंद्रमा के दर्शन तथा पूजा के बाद व्रत खोलती हैं. करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय नई दिल्ली में रात को 8 बजकर 17 मिनट रहेगा. शहरों के मुताबिक यह समय अलग हो सकता है.
करवा चौथ व्रत की सामग्री
मिट्टी का करवा
पूजा की थाली
दीपक और घी या तेल
रोली और कुमकुम
अक्षत (साबुत चावल)
फल, फूल और मिठाई
जल से भरा पात्र
चांद देखन के लिए छलनी
शिव परिवार की तस्वीर
करवा चौथ कैलेंडर
बता दें कि, स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री में कुछ बदलाव हो सकते हैं. आप अपने रीति-रिवाजों के मुताबिक, सभी जरूरी सामग्री एकत्रित कर लें.
करवा चौथ व्रत की विधि
करवा चौथ व्रत के अवसर पर सुबह महिलाएं स्नान करें. सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करें. सरगी में फल, मिठाई और मेवा खा सकते हैं. आप व्रत का संकल्प लें. शाम के समय शुभ मुहूर्त में माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करें. आप करवा चौथ कैलेंडर लगाकर पूजा-अर्चना करें. पूजा के दौरान महिलाएं सामूहिक रूप से कथा का पाठ करें. शाम को चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत संपन्न करें.
करवा चौथ व्रत कथा (Karwa Chauth Vrat Katha)
करवा चौथ व्रत पर आपको वीरावती की कथा का पाठ करना चाहिए. करवा चौथ से जुड़ी वीरावती की कथा काफी प्रचलित हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में वीरावती नाम की एक सुंदर और संस्कारी राजकुमारी रहती थी. उसके सात भाई थे. वह सात बहनों की अकेली बहन थी. विवाह के बाद पहले करवा चौथ पर वीरावती ने अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से पूरे विधि-विधान के साथ व्रत रखा. वीरावती ने सूर्योदय से निर्जला व्रत रखा. वीरावती को दिन बीतने के साथ भूख-प्यास लगने लगी. अपनी बहन की हालत देखकर सातों भाई परेशान हो गए.
बहन वीरावती का व्रत जल्दी खोलने के लिए भाइयों ने एक पेड़ के पीछे दीपक जलाकर ऐसा आभास कराया, मानो चंद्रमा निकल आया हो. वीरावती ने उसे चंद्रमा समझ लिया और चंद्रमा के दर्शन की परंपरा पूरी किए बिना ही भोजन कर लिया. इसके बाद उसे अपने पति के बारे में दुखद समाचार मिला. इससे वीरावती दुखी हुई. इसके बाद उसने सच्चे मन से देवी-देवताओं से प्रार्थना की. कथा के अनुसार, वीरावती की श्रद्धा, धैर्य और निरंतर भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान की कृपा हुई और उसके पति को जीवनदान मिला.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यातों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
करवा चौथ से जुड़े पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)