Kali Chaudas 2026 Today: दिवाली पर्व के दौरान कई व्रत-त्योहार आते हैं. दिवाली से पहले कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को काली चौदस मनाई जाती है. काली चौदस पर मां काली की पूजा करने की परंपरा है. काली चौदस का पर्व मुख्य रूप से गुजरात और पश्चिम भारत के कई स्थानों पर मनाई जाती है. काली चौदस पर रात के समय पूजा करने का विधान है. बता दें कि, चतुर्दशी की रात को निशिता काल में पूजा के कारण काली चौदस छोटी दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है.
काली चौदस का महत्व
काली चौदस पर मां काली की पूजा की जाती है. नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं. काली चौदस पर मां काली की पूजा-अर्चना करने से वह भक्तों की बुरी शक्तियों, नकारात्मक ऊर्जा, और नजर दोष से रक्षा करती हैं. काली चौदस पर पूजा करने से जीवन में भय मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. आप काली चौदस पर पूजा कर मां काली से जीवन में सुख-शांति की कामना करें.
काली चौदस 2026 पूजा मुहूर्त
चतुर्दशी तिथि आरंभ – 07 नवंबर, 2026 को सुबह 10 बजकर 47 मिनट
चतुर्दशी तिथि समाप्त – 08 नवंबर, 2026 को दोपहर 11 बजकर 27 मिनट
पूजा शुभ मुहूर्त – काली चौदस पर मां काली की पूजा रात को करने का विधान हैं. पूजा का मुहूर्त रात को 11 बजकर 39 मिनट से लेकर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. काली चौदस पर आप निशिता काल में विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं.
काली चौदस मां काली पूजा विधि
काली चौदस पर सुबह उठने के बाद मां काली का ध्यान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें. आप सुबह मां काली की पूजा करें. इसके बाद रात्रि के समय निशिता काल में दोबारा मां काली की अराधना के लिए स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. चौकी लगाकर मां काली की प्रतिमा स्थापित करें. मां के समक्ष दीप और धूप जलाएं. मां काली के मंत्रों का जाप करें. मां काली को मिठाई और फल का भोग लगाएं. इसके साथ ही आरती कर पूजा संपन्न करें. काली चौदस की पूजा करने के बाद मां काली से जीवन में सुख-शांति के लिए कामना करें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.