हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

Kalawa Wearing Rules: कितने दिनों बाद उतार देना चाहिए कलावा? जानिए रक्षासूत्र से जुड़े हुए धार्मिक नियम

Kalawa Wearing Rules: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान कलाई पर कलावा बांधने की परंपरा है. कलावा बांधने के बाद इसे कितने दिनों के बाद उतार देना चाहिए. कलावा बांधने को लेकर क्या नियम है आइये इसके बारे में जानते हैं.

विज्ञापन
कलावा बांधने से जुड़े जरूरी नियम (Photo Credit - AI)

Kalawa Wearing Rules: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और हवन आदि के दौरान कलावा बांधने की परंपरा है. किसी भी शुभ कार्य से पहले रोली-अक्षत से तिलक किया जाता है. इसके साथ ही हाथ की कलाई पर कलावा बांधा जाता है. कवाले को रक्षासूत्र या मौली भी कहते हैं. कलावा बांधने को लेकर कई नियमों के बारे में बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलावा कितने दिनों तक बांधे रखने के बाद खोल देना चाहिए. बांधने को लेकर क्या नियम हैं. इन सभी के बारे में आप यहां जान सकते हैं.

कलावा बांधने के नियम

पूजा पाठ और हवन के दौरान तिलक लगाने और कलावा बांधने की परंपरा है. कलावा बांधने के लिए अलग-अलग नियम हैं. पुरुषों के दाएं हाथ में कलावा बांधा जाता है. लड़कियों के दाएं हाथ में कलावा बांधने के नियम हैं. हालांकि, शादी के बाद महिलाओं के बाएं हाथ में कलावा बांधा जाता है. शादी के बाद पत्नी को पती की वामांगिनी माना जाता है. इसका अर्थ शरीर का बांया अंग होता है.

ये भी पढ़ें – Shardiya Navratri 2026: खाने से जुड़ी गलतियों के अलावा इन कारणों से टूट सकता है नवरात्रि का व्रत, जानिए जरूरी नियम

विज्ञापन

शादीशुदा महिलाओं के शरीर के बाएं भाग को शक्ति का प्रतीक माना जाता है. इस कारण बाएं हाथ में कलावा बांधना शुभ होता है. कलावा बांधने के लिए इसे कलाई पर 3, 5 या 7 बार लपेटा जाता है. कलावा बांधने से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से बचाव होता है. मान्यताओं के अनुसार, कलावे को त्रिदेव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक मानते हैं. कलावा बांधने से शुभ परिणाम मिलते हैं.

कब खोलना चाहिए कलावा?

कलावा 21 दिनों तक पहनने के बाद इसे खोल सकते हैं. हालांकि. कलावा ढीला होने पर या इसका रंग उतरने पर पहले भी उतार सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिवार या मंगलवार के दिन कलावा उतार सकते हैं. कलावा खोलने के बाद घर के मंदिर में विसर्जन के लिए इकट्ठा की गई पूजा की सामग्री के साथ रख दें. आप कलावे को पीपल के पेड़ के नीचे रख सकते हैं. आप पुराना कलावा उतारने के बाद दूसरा कलावा बांध सकते हैं.

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Aman Maheshwari

अमन माहेश्वरी न्यूज 24 में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह खबरों को समझकर पाठकों तक आसान शब्दों में पहुंचाने का काम बखूबी करते हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन (BJMC) किया है. इसके बाद उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन (MJMC) किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. सबसे पहले जी मीडिया डीएनए हिंदी के साथ जुड़े. पिछले 5 साल से अमन डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं. डीएनए हिंदी में बतौर ट्रेनी जर्नलिस्ट ज्वाइन किया. इसके बाद सब एडिटर के पद पर काम किया. वर्तमान में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अमन ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और प्रयागराज में महाकुंभ मेले के दौरान धार्मिक खबरों को बखूबी कवर किया. धर्म और ज्योतिष - अमन धर्म-ज्योतिष सेक्शन के लिए लिखने के दौरान अंक ज्योतिष, वास्तु, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार से जुड़े विषयों पर लेख तैयार करते हैं. देवी-देवता और उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं, मंदिर, तीर्थ, धार्मिक स्थल और धार्मिक परंपराएं से जुड़े लेख लिखते हैं. इसके साथ ही धार्मिक यात्राओं से जुड़े उपयोगी लेख अमन तैयार करते हैं. Email - aman@bagconvergence.in X Account - MrAman0501
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola