– होलिका की अग्नि का अपमान नहीं करना चाहिए.
– अग्नि जल रही है तो आपको इसके आसपास हंसी-मजाक में अभद्र व्यवहार नहीं करना चाहिए.
– होलिका की अग्नि को लांघना नहीं चाहिए यह बुरा माना जाता है.
– होलिका की तरफ पीठ करके नहीं बैठना चाहिए.
– नशे की हालत में पूजा नहीं करनी चाहिए और होलिका के पास नहीं जाना चाहिए.
होली का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. होलिका दहन पर पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है. रोग और भय से मुक्ति मिलती है. होली की अग्नि में जौ और गेहूं की बालियों की आहुति देने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. घर-परिवार की कलह का नाश होता है.
होलिका को अग्नि देने के लिए अक्सर गांव या मोहल्ले के सम्मानित या वरिष्ठ को चुना जाता है. होलिका दहन की अग्नि सम्मानित पुरुष और कुल के मुखिया को जलानी चाहिए. होलिका दहन की अग्नि जलाने के लिए कई लोग पंडित और घर के बुजुर्ग को चुनते हैं. यह लोग होली की अग्नि प्रज्वलित कर सकते हैं.
आप कर्ज से परेशान हैं और आपके हाथ में पैसा नहीं टिकता है तो आर्थिक संपन्नता के लिए होलिका दहन की रात खास उपाय करना चाहिए. एक नारियल लें और इसके ऊपर 10 का सिक्का रखकर कलावा बांधे. इस नारियल को होलिका दहन के समय आर्थिक परेशानियों के दूर होने की प्रार्थना करते हुए होली की अग्नि में फेंक दें. इस उपाय को करने से आर्थिक लाभ होगा और घर में बरकत आएगी.
साल 2026 में होलिका दहन का समय थोड़ी उलझन भरी हो सकती है, क्योंकि चंद्र ग्रहण और भद्रा भी हैं। लेकिन ज्योतिष और पंचांग के हिसाब से, यह त्योहार मनाने का सबसे शुभ समय तय किया गया है।
शुभ समय (मुख्य मुहूर्त)
दिल्ली और नोएडा में समय
इस समय में होलिका दहन करना सबसे सही और शुभ माना जाता है। इस दौरान आप परिवार के साथ दीप और रंगोली सजाकर त्योहार की खुशियाँ दोगुनी कर सकते हैं।
होलिका दहन में कई सारी सामग्री अर्पित की जाती है. इनमें से एक नारियल है. नारियल दो प्रकार का होता है. ऐसे में होलिका में सूखा या पानी वाला कौन सा नारियल अर्पित करना चाहिए इसको लेकर लोग कन्फ्यूज रहते हैं. बता दें कि, होलिका दहन में हमेशा सूखा नारियल अर्पित करें. होलिका में पानी वाला नारियल नहीं चढ़ाना चाहिए.
– होलिका दहन के दिन पैसों का लेन-देन करने से बचें ऐसा करना अच्छा नहीं माना जाता है.
– होलिका दहन के अवसर पर आपको मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए.
– शादी के बाद ननविवाहित महिला को ससुराल में होली नहीं मनानी चाहिए.
– होलिका दहन के दिन काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए और महिलाओं को खुले बाल नहीं रखने चाहिए.
आज 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा. होलिका दहन का पर्व बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है. आप होलिका दहन के समय होलिका की अग्नि की परिक्रमा करें और होली में जौ-गेहूं की बालियां की आहूति दें. यह बहुत ही शुभ माना जाता है. होलिका दहन के बाद आप इसकी राख को घर लाकर रख सकते हैं. इससे वास्तु दोष खत्म होते हैं.
नृसिंह भगवान आरती (Narasimha Bhagwan Ki Aarti)
ॐ जय नरसिंह हरे, प्रभु जय नरसिंह हरे ।
स्तंभ फाड़ प्रभु प्रकटे, जनका ताप हरे ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
तुम हो दिन दयाला, भक्तन हितकारी,
प्रभु भक्तन हितकारी। अद्भुत रूप बनाकर,
अद्भुत रूप बनाकर, प्रकटे भय हारी ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
सबके ह्रदय विदारण, दुस्यु जियो मारी,
प्रभु दुस्यु जियो मारी। दास जान आपनायो,
दास जान आपनायो, जनपर कृपा करी ॥
ॐ जय नरसिंह हरे ॥
ब्रह्मा करत आरती, माला पहिनावे,
प्रभु माला पहिनावे। शिवजी जय जय कहकर,
पुष्पन बरसावे ॥ ॐ जय नरसिंह हरे ॥
होली का पर्व फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है. यह तिथि 3 मार्च को है लेकिन होली पर चंद्र ग्रहण लगने के कारण होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा. हर साल होलिका दहन के अगले दिन होली खेली जाती है लेकिन ग्रहण के कारण रंगोत्सव मनाना शुभ नहीं होगा. ऐसे में रंगों वाली होली 3 मार्च को नहीं बल्कि, 4 मार्च को मनाया जाता है.
होलिका में अर्पित की जाने वाली चीजों को ही होलिका दहन का प्रसाद माना जाता है.
होलिका दहन के बाद होली की राख से कई उपाय कर सकते हैं. होलिका दहन की राख को घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में रख सकते हैं. इस दिशा में अग्नि को रखने से नकारात्मकता दूर होती है. आप होलिका दहन की राख की पोटली बनाकर घर के साथ ही ऑफिस में रख सकते हैं इसे मुख्य द्वार पर लटकाना शुभ माना जाता है. आप इन सभी उपायों को कर सकते हैं.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, होलिका दहन की 3, 5, 7 या 11 बार परिक्रमा करना शुभ होता है.
ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य के अनुसार, होलिका दहन का समय हर शहर में सूर्यास्त के हिसाब से अलग होता है। यहां प्रमुख शहरों के लिए समय दिया गया है:
दिल्ली, नोएडा, मथुरा: शाम 6:20 बजे से रात 8:50 बजे तक
भोपाल: शाम 6:24 बजे से रात 8:50 बजे तक
लखनऊ: शाम 6:09 बजे से रात 8:37 बजे तक
पटना: शाम 6:00 बजे से रात 8:15 बजे तक
मुंबई: शाम 6:45 बजे से रात 9:10 बजे तक
चंडीगढ़, शिमला: शाम 6:25 बजे से रात 8:55 बजे तक
जयपुर: शाम 6:30 बजे से रात 8:59 बजे तक
वाराणसी: शाम 6:02 बजे से रात 8:58 बजे तक
रायपुर: शाम 6:11 बजे से रात 8:38 बजे तक
बेंगलुरु: शाम 6:30 बजे से रात 8:55 बजे तक
चेन्नई: शाम 6:22 बजे से रात 8:47 बजे तक
हैदराबाद: शाम 6:50 बजे से रात 8:32 बजे तक
होली के पर्व पर होलिका दहन के दौरान होली की अग्नि में जौं-गेहूं की बालियां की आहूति दी जाती है. जौं-गेहूं की आहूति नई फसल के अच्छे होने की कामना के लिए दी जाती है. लोग अग्नि को पवित्र मानकर फसल उन्हें समर्पित करते हैं. यह सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है.
Holika Dahan 2026, Shubh Muhrat Updates: होली से पहले होलिका दहन का पर्व मनाया जाता है, जिस दिन शाम के समय लकड़ी से पवित्र अग्नि जलाई जाती है और उसकी पूजा होती है. हालांकि, इस बार भद्रा काल और चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन की सही तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर लोगों के मन में असमंजस की स्थिति है. जहां कुछ लोग आज 2 मार्च 2026 को होलिका दहन का पर्व मना रहे हैं, वहीं कई लोग कल 3 मार्च 2026 को भी होलिका की पूजा करेंगे. ऐसे में पिछले साल की तरह इस बार भी दो तिथियों का संयोग बन रहा है.
आज या कल, होलिका दहन कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, आज 2 मार्च 2026 को होलिका दहन का पर्व मनाया जा सकता है, लेकिन पूजा का शुभ मुहूर्त देर रात में ही है.
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होलिका दहन की पूजा का शुभ मुहूर्त
जो लोग आज 2 मार्च 2026 को होलिका दहन का पर्व मना रहे हैं, वो भद्रा पुच्छ और प्रदोष काल में होलिका जला सकते हैं.
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- आज शाम 5 बजकर 18 मिनट से लेकर कल 3 मार्च की सुबह 4 बजकर 56 मिनट तक भद्रा रहेगी. ऐसे में भद्रा पुच्छ में होलिका दहन कर सकते हैं, जो कि भद्रा काल का अंतिम चरण होता है. इसमें मांगलिक कार्यों को करना उचित माना गया है. आज 2 मार्च की रात 11 बजकर 53 मिनट से लेकर कल 3 मार्च की सुबह 1 बजकर 26 मिनट तक भद्रा पुच्छ रहेगी.
- जो लोग प्रदोष काल में पूजा-पाठ करते हैं, वो आज शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट के बीच भी होलिका जला सकते हैं.
होलिका पूजन मंत्र
- भक्त प्रह्लाद का मंत्र- ओम प्रह्लादाय नम:
- भगवान नृसिंह का मंत्र- ओम नृसिंहाय नम:
- भगवान नृसिंह का गायत्री मंत्र- ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नरसिंह प्रचोदयात।।
- भगवान नृसिंह का मंत्र- नृसिंह देवदेवेश तव जन्मदिने शुभे। उपवासं करिष्यामि सर्वभोगविवर्जितः॥
- भगवान नृसिंह का बीज मंत्र- ॐ श्री लक्ष्मीनृसिंहाय नम:।।
होलिका दहन की पूजा विधि, कथा, पूर्णिमा तिथि, उपाय, मंत्र, आरती और अन्य जानकारी के लिए बने रहें News24 के साथ...