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Hindu Calendar: खरमास, मलमास, चातुर्मास और क्षयमास क्या हैं? जानें हिन्दू कैलेंडर के इन महीनों की खासियत

Hindu Calendar: हिंदू पंचांग समय, परंपरा और खगोलीय गणना का अनोखा संगम है, जो जीवन की लय तय करता है. खरमास, मलमास, चातुर्मास और क्षयमास जैसे काल साधना, संयम और नियमों से जुड़े विशेष समय हैं. आइए जानते हैं, हिन्दू कैलेंडर के इन महीनों की खासियत क्या हैं?

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Hindu Calendar: हिंदू पंचांग सिर्फ तिथियों का हिसाब नहीं, बल्कि जीवन की लय को समझने का माध्यम भी है. इसमें कुछ विशेष समय ऐसे होते हैं, जो सामान्य दिनों से अलग माने जाते हैं. ये अवधि धार्मिक नियम, खगोलीय घटनाओं और परंपराओं से जुड़ी हैं. हिन्दू काल गणना में खरमास, मलमास, चातुर्मास और क्षयमास ऐसे ही चार खास कालखंड हैं, जो पूजा, साधना और जीवनशैली को प्रभावित करते हैं. आइए जानते हैं, हिन्दू कैलेंडर के इन महीनों की खासियत क्या हैं?

खरमास: ठहराव और साधना का समय

खरमास तब माना जाता है, जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करता है. यह समय लगभग साल में दो बार आता है. मान्यता है कि इस दौरान सूर्य का प्रभाव कमजोर होता है. इसलिए विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य रोके जाते हैं. यह समय आत्मचिंतन, दान और भगवान विष्णु की उपासना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. कई लोग इस अवधि में तीर्थ यात्रा और जप-तप पर ध्यान देते हैं.

मलमास: संतुलन का अतिरिक्त महीना

मलमास, जिसे अधिकमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, हर तीन साल के आसपास आता है. यह चंद्र और सौर कैलेंडर के अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है. इस महीने में भी शुभ कार्य नहीं किए जाते. लेकिन पूजा, व्रत और धार्मिक ग्रंथों के पाठ का महत्व बढ़ जाता है. परंपरा के अनुसार, यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे आध्यात्मिक उन्नति का अवसर माना जाता है. इस साल यह 17 मई से 15 जून, 2026 तक है।

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चातुर्मास: चार महीनों की अनुशासन यात्रा

चातुर्मास आषाढ़ शुक्ल एकादशी से शुरू होकर कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है. यह करीब चार महीने की अवधि होती है. मान्यता है कि इस समय भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं. इस दौरान संत और साधु एक स्थान पर रहकर साधना करते हैं. आम लोग भी उपवास, संयम और सात्विक जीवन अपनाते हैं. विवाह जैसे कार्य इस समय टाले जाते हैं. इस साल चातुर्मास 15 जुलाई 2026 (देवशयनी एकादशी) से शुरू होकर 12 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक रहेगा।

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क्षयमास: दुर्लभ खगोलीय घटना

क्षयमास बहुत ही दुर्लभ होता है. यह तब बनता है, जब एक चंद्र मास में दो संक्रांतियां पड़ती हैं. इससे पंचांग का एक महीना कम हो जाता है. यह घटना कई दशकों या शताब्दियों में एक बार होती है. इस दौरान भी शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. यह आमतौर पर कार्तिक, मार्गशीर्ष या पौष के आसपास आता है.

क्यों महत्वपूर्ण है ये ज्योतिष परंपरा?

इन सभी कालखंडों का आधार खगोल विज्ञान और परंपरागत मान्यताएं हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समय जीवन में रुककर सोचने, सुधार करने और आध्यात्मिक संतुलन बनाने का मौका देता है. आज के दौर में भी लोग इन अवधियों में बड़े फैसले टालते हैं और मानसिक शांति के लिए ध्यान, योग और दान को अपनाते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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