Kali Chaudas Hanuman Puja 2026: आज 7 नवंबर 2026 दिन शनिवार को काली चौदस है. काली चौदस पर हनुमान जी की पूजा का विधान है. आज आप बजरंगबली को प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना और उपायों को कर सकते हैं. बता दें कि, आज काली चौदस पर मां काली की पूजा की परंपरा भी है. काली चौदस पर हनुमान जी की पूजा क्यों की जाती है इसको लेकर कई मान्यातएं हैं. आइये इनके बारे में जानते हैं.
काली चौदस पर हनुमान पूजा की परंपरा
काली चौदस पर हनुमान जी की पूजा की परंपरा के पीछे कई कारण बताए जाते हैं. अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार, काली चौदस पर हनुमान पूजा के महत्व को समझते हैं.
हनुमान जी के सूर्य निगलने की कथा – पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार हनुमान जी ने बाल अवस्था में सूर्य को फल समझकर निगलने की कोशिश की थी. हनुमान जी ने सूर्य को मुख में रख लिया था. तभी सृष्टि की रक्षा के लिए देवराज इंद्र ने बाल हनुमान की ठोड़ी पर अपने वज्र से प्रहार किया. इसके बाद हनुमान जी मूर्छित हो गए. हनुमान जी के पिता पवन देव ने संसार में वायु का प्रवाह रोक दिया. सृष्टि को बचाने के लिए ब्रह्मा जी सभी देवताओं ने हनुमान जी को अमरता, असीम शक्तियों और अस्त्र-शस्त्रों का वरदान दिया. यह दिन काली चौदस का था.
प्रभु श्रीराम का वरदान – पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या वापस आए तब सभी ने उनका स्वागत किया. भगवान राम के अयोध्या आगमन पर अयोध्यावासियों ने प्रसन्नता में दिवाली उत्सव मनाया. तब भगवान राम ने हनुमान जी को वरदान दिया कि, दिवाली से एक दिन पहले हनुमान की पूजा की जाएगी.
नकारात्मक शक्तियों से बचाव के लिए – काली चौदस पर नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव अधिक होता है. हनुमान जी को नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला माना जाता है. हनुमान जी की पूजा करने से बुरी शक्तियों, भय, रोग और दोष से मुक्ति मिलती है. इस वजह से काली चौदस पर हनुमान जी की पूजा करना शुभ होता है. बता दें कि, अन्य मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं.
काली चौदस पर करें हनुमान जी की पूजा
काली चौदस पर हनुमान जी की पूजा के लिए घर के पूजा स्थान की सफाई कर लकड़ी की चौकी लगाएं. चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें. ध्यान रहे हैं कि, आप पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करें. आप हनुमान जी के साथ ही भगवान राम या राम दरबार की प्रतिमा स्थापित करें. हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष चमेली के तेल या शुद्ध देसी घी का दीपक प्रज्वलित करें. हनुमान जी को लाल सिंदूर, चमेली का तेल, अक्षत और गुलाब के पुष्प अर्पित करें. बूंदी के लड्डू, गुड़-चना या देसी घी से बना चूरमा का भोग लगाएं. आप 7, 11 या 21 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें. अंत में हनुमान जी की आरती कर पूजा संपन्न करें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.