Guru Purnima 2026 Date: गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पावन पर्व है, जो गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान के सम्मान का प्रतीक माना जाता है. इस दिन लोग अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और जीवन में मार्गदर्शन के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. साल 2026 में गुरु पूर्णिमा की तिथि को लेकर कई लोगों में संशय है कि यह 30 अप्रैल या 1 मई को होगी या नहीं, लेकिन पंचांग के अनुसार इसका संबंध आषाढ़ पूर्णिमा से होता है. आइए जानते हैं इसकी सही तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी.

गुरु पूर्णिमा 2026 कब है?

गुरु पूर्णिमा हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जिसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. वर्ष 2026 में पूर्णिमा तिथि का आरंभ 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे से होगा. यह तिथि 29 जुलाई 2026 को रात 08:05 बजे तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई 2026 को मनाना शुभ माना गया है.

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गुरु पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

यह दिन गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्ते को समर्पित होता है. शिष्य अपने जीवन में मिले ज्ञान के लिए गुरु का आभार प्रकट करते हैं. मान्यता है कि महर्षि वेद व्यास का जन्म इसी दिन हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. गुरु को जीवन का अंधकार दूर करने वाला प्रकाश माना जाता है, जो सही मार्ग दिखाते हैं.

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बुद्ध पूर्णिमा से संबंध

कुछ परंपराओं में इस दिन को गौतम बुद्ध से भी जोड़ा जाता है. कहा जाता है कि बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में इसी समय के आसपास दिया था. इसलिए यह दिन ज्ञान, करुणा और आत्मिक जागरूकता का प्रतीक भी बन जाता है.

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गुरु पूर्णिमा 2026: शुभ मुहूर्त

इस दिन कई शुभ योग और मुहूर्त विशेष महत्व रखते हैं:

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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:05 से 04:47 बजे तक रहेगा.
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:21 बजे तक शुभ माना गया है.
अमृत काल: सुबह 08:34 से 10:20 बजे तक रहेगा.

पूजा के लिए सबसे उत्तम समय 29 जुलाई 2026 को सुबह 05:40 से दोपहर 12:00 बजे तक बताया गया है.

गुरु पूजा की परंपरा

इस दिन शिष्य अपने गुरु के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हैं. पुष्प, वस्त्र और दक्षिणा देकर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है. कई स्थानों पर सत्संग, भजन और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है. विद्यार्थी अपने शिक्षकों को सम्मान देकर आभार व्यक्त करते हैं.

आध्यात्मिक संदेश और महत्व

गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मिक उन्नति का अवसर भी है. यह दिन व्यक्ति को विनम्रता, ज्ञान और सही दिशा की ओर प्रेरित करता है. गुरु के बिना जीवन अधूरा माना जाता है, और यह पर्व उसी संबंध को मजबूत बनाता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.