Chanakya Niti: सफलता और समृद्धि का सपना हर व्यक्ति देखता है, लेकिन हर कोई उसे हासिल नहीं कर पाता. आखिर ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोग पढ़ाई में आगे बढ़ते हैं और कुछ लोग पीछे रह जाते हैं. प्राचीन नीति ग्रंथ में आचार्य चाणक्य ने ऐसे ही एक अवगुण का उल्लेख किया है, जो व्यक्ति को विद्या से दूर कर देता है. यह अवगुण धीरे-धीरे तंगहाली और परेशानियों का कारण बनता है.

विद्या से दूरी का असली कारण

आचार्य चाणक्य ने अपने नीति विचारों में स्पष्ट कहा है कि आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है. जो व्यक्ति आलसी होता है, वह न तो ठीक से अध्ययन कर पाता है और न ही शास्त्र का यथार्थ ज्ञान प्राप्त कर पाता है. उसके भीतर सीखने की ललक कम हो जाती है. समय निकलता रहता है, पर वह प्रयास नहीं करता.

---विज्ञापन---

सुख भोग की इच्छा और ज्ञान

आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति केवल आराम और सुख भोग में लगा रहता है, वह कभी भी गहरी विद्या हासिल नहीं कर सकता. ज्ञान पाने के लिए अनुशासन जरूरी है. त्याग जरूरी है. देर रात तक जागकर पढ़ना, नियमित अभ्यास करना और ध्यान केंद्रित रखना जरूरी होता है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: Chanakya Niti: आंखें होते हुए भी अंधे क्यों होते हैं लोग, आचार्य चाणक्य से जानें जीवन का एक कड़वा सच

आलस्य का दुष्प्रभाव

आलसी व्यक्ति काम को टालता है. अवसर हाथ से निकल जाते हैं. धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगती है. ऐसे लोग अक्सर तंगहाली का सामना करते हैं. परिवार भी चिंता में रहता है. जिम्मेदारियां पूरी नहीं हो पातीं.

विद्या ही असली धन

आचार्य चाणक्य ने विद्या को सबसे बड़ा धन बताया है. धन कभी भी खत्म हो सकता है, लेकिन ज्ञान साथ रहता है. संकट की घड़ी में पैसा काम न आए, तो समझ और बुद्धि रास्ता दिखाती है. यही कारण है कि उन्होंने शिक्षा को जीवन की आधारशिला माना.

सफलता का सरल मंत्र

आचार्य चाणक्य का संदेश स्पष्ट है कि आलस त्यागें. समय का सम्मान करें. नियमित अध्ययन करें. लक्ष्य तय करें. सुख के मोह से ऊपर उठें. तभी विद्या प्राप्त होगी और जीवन में स्थिर सफलता मिल सकेगी.

यह भी पढ़ें: Chanakya Nit: श्मशान जैसे बन जाते हैं ऐसे घर, नहीं टिकती सुख-शांति, आने से डरती है खुशहाली

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.