Chaitra Navratri 2026 (Day 7 Maa Kalratri) Today Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Mantra & Aarti: आज मां दुर्गा को समर्पित चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन है. नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का दिन होता है. जो भी भक्त नवरात्रि में सच्चे मन से व्रत और पूजा करता है उसके पाप नष्ट होते हैं. व्रत करने से मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है. मां दुर्गा की कृपा से जीवन सुख, खुशहाली, धन, वैभव और समृद्धि से भर जाता है. नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा से भक्तों की हर संकट से रक्षा होती है. आज 25 मार्च को चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन के पूजा मुहूर्त, मंत्र और आरती के बारे में जानते हैं.

मां कालरात्रि का दिव्य स्वरूप

देवी दुर्गा का सातवां स्वरूप उग्र है. मां गधे पर सवार हैं. मां का स्वरूप गहरे काले रंग का बिखरे बालों वाला और और तीन नेत्रों वाला है. मां कालरात्रि की चार भुजाएं हैं. दो भुजाओं में खड्ग और लौह कांटा है. देवी मां की दो भुजाएं वर और अभय मुद्रा में है. मां कालरात्रि का रूप भयानक है इसके बावजूद मां भक्तों के लिए कल्याणकारी हैं.

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मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त

सूर्योदय – सुबह 06:20
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 04:45 से 05:33
प्रातः सन्ध्या- सुबह में 05:09 से 06:20
सायाह्न सन्ध्या- शाम में 06:35 से 07:45
अमृत काल- रात में 09:19 से 10:48

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मां कालरात्रि की पूजा विधि

  • चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है.
  • आप सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें.
  • इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करें और गंगाजल से शुद्ध करें.
  • पूजा स्थान पर मां कालरात्रि की प्रतिमा स्थापिक करें.
  • मां की प्रतिमा के समक्ष रोली, कुमकुम, अक्षत, फूल, धूप और दीप अर्पित करें.
  • मंत्रों का जाप करें और गुड़ या गुड़ से बनी चीजों को भोग लगाकर आरती करें.

मां कालरात्रि का प्रिय भोग

आपको आज मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ का भोग लगाना चाहिए. देवी मां कालरात्रि को गुड़ से बनी चीजों का भोग लगाना अच्छा होता है. आप मां को गुड़ का हलवा, गुड़ के गुलगुले और गुड़ से बनी खीर का भोग लगा सकते हैं. मां कालरात्रि को गुड़ अति प्रिय माना जाता है.

मां कालरात्रि का मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः

मां कालरात्रि की आरती

कालरात्रि जय जय महाकाली। काल के मुंह से बचाने वाली॥
दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतारा॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥
खड्ग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥
सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदन्ता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥
ना कोई चिंता रहे ना बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवे। महाकाली माँ जिसे बचावे॥
तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि माँ तेरी जय॥

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.