Bajrang Baan: भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ करते है. मंगलवार के दिन भक्त बजरंगबली का आशीर्वाद पाने के लिए मंदिर जाते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं. आप हनुमान जी की कृपा के लिए हनुमान चालीसा का साथ ही बजरंग बाण का पाठ कर सकते हैं. हर मंगलवार और शनिवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करना बेहद शुभ और लाभकारी माना जाता है.

बजरंग बाण का पाठ करने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन में चल रही परेशायनियों का अंत होता है. नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए बजरंग वाण का पाठ करना चाहिए. यह गंभीर संकटों, शत्रुओं के भय और रोगों से मुक्ति में सहायक सिद्ध होता है. मांगलिक दोष को दूर करने और कार्य सफलता के लिए हर मंगलवार और शनिवार के दिन बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें - देवगुरु बृहस्पति की प्रिय होती हैं ये 3 राशियां, गुरु के आशीर्वाद से को मिलता है पैसा और मान-सम्मान

---विज्ञापन---

बजरंग बाण का पाठ (Bajrang Baan Lyrics In Hindi)

दोहा

---विज्ञापन---

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

---विज्ञापन---

चौपाई

---विज्ञापन---

जय हनुमन्त संत हितकारी ।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।

जन के काज बिलम्ब न कीजै ।
आतुर दौरि महासुख दीजै ।।

जैसे कूदी सिन्धु महि पारा ।
सुरसा बदन पैठी विस्तारा ।।

आगे जाय लंकिनी रोका ।
मारेहु लात गई सुर लोका ।।

जाय विभीषण को सुख दीन्हा ।
सीता निरखि परम-पद लीना ।।

बाग उजारि सिन्धु मह बोरा ।
अति आतुर जमकातर तोरा ।।

अक्षय कुमार मारि संहारा ।
लूम लपेटि लंक को जारा ।।

लाह समान लंक जरि गई ।
जय-जय धुनि सुरपुर में भई ।।

अब बिलम्ब केहि कारन स्वामी ।
कृपा करहु उर अन्तर्यामी ।।

जय जय लखन प्रान के दाता ।
आतुर होई दु:ख करहु निपाता ।।

जै गिरिधर जै जै सुख सागर ।
सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥

ओम हनु हनु हनु हनुमंत हठीले ।
बैरिहि मारु बज्र की कीले॥

गदा बज्र लै बैरिहि मारो ।
महाराज प्रभु दास उबारो ।।

ओंकार हुंकार महाप्रभु धाओ ।
बज्र गदा हनु विलम्ब न लाओ ।।

ओम ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा ।
ओम हुं हुं हुं हनु अरि उर-सीसा॥

ये भी पढ़ें – Mahabharat: अत्यंत सुंदर और रूपमति थीं द्रौपदी, जानिए क्या था उनकी सुंदरता का राज?

सत्य होहु हरी शपथ पायके ।
राम दूत धरु मारू जायके

जय जय जय हनुमन्त अगाधा ।
दुःख पावत जन केहि अपराधा ।।

पूजा जप-तप नेम अचारा ।
नहिं जानत हो दास तुम्हारा ।।

वन उपवन मग गिरि गृह मांहीं ।
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।।

पायं परौं कर जोरी मनावौं ।
येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।

जय अंजनी कुमार बलवंता ।
शंकर सुवन वीर हनुमंता ।।

बदन कराल काल कुलघालक।
राम सहाय सदा प्रतिपालक ।।

भूत प्रेत पिसाच निसाचर।
अगिन वैताल काल मारी मर ।।

इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की ।
राखउ नाथ मरजाद नाम की ।।

जनकसुता हरि दास कहावो ।
ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।।

जै जै जै धुनि होत अकासा ।
सुमिरत होत दुसह दुःख नासा ।।

चरण शरण कर जोरि मनावौं ।
यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।

उठु उठु चलु तोहि राम-दोहाई ।
पायँ परौं, कर जोरि मनाई ।।

ओम चं चं चं चं चपल चलंता ।
ओम हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ।।

ओम हं हं हाँक देत कपि चंचल ।
ओम सं सं सहमि पराने खल-दल ।।

अपने जन को तुरत उबारौ ।
सुमिरत होय आनंद हमारौ ।।

यह बजरंग बाण जेहि मारै।
ताहि कहो फिर कोन उबारै ।।

पाठ करै बजरंग बाण की ।
हनुमत रक्षा करैं प्रान की ।।

यह बजरंग बाण जो जापैं ।
ताते भूत-प्रेत सब कापैं ।।

धूप देय अरु जपै हमेशा ।
ताके तन नहिं रहै कलेसा ।।

दोहा

उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान।
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥

ये भी पढ़ें- Navpancham Drishti: होने वाला है इन 4 राशियों का अच्छा समय शुरू, मंगल-यम बनाएंगे नवपंचम दृष्टि

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्याओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.