Bada Mangal 2026: हिन्दू धर्म में जेठ यानी ज्येष्ठ महीने का मंगलवार कोई आम दिन नहीं, बल्कि ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ कहलाता है, जो भगवान शिव के दशांश अवतार बजरंगबली की विशेष आराधना का व्रत और पर्व है. कल यानी 12 मई 2026 को इसी मास का दूसरा ‘बड़ा मंगल’ पड़ रहा है. एक पौराणिक कथा के अनुसार, मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान हनुमान जी का प्रभु राम से मिलन भी हुआ था और इसी दिन उन्होंने महाबली भीम का अहंकार तोड़ा था. आइए जानते हैं, कल बजरंग बली की पूजा का शुभ समय क्या है और उन्हें क्या-क्या चीजें अर्पित कर सकते हैं, ताकि हम सब पर उनकी कृपा बनी रहे?
दूसरा ‘बड़ा मंगल’ का शुभ मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, कल मंगलवार की सुबह 4 बजकर 8 मिनट से 4.50 तक ब्रह्म मुहूर्त है, जो स्नान-ध्यान कर पूजा की शुरुआत का सर्वोत्तम समय होता है. इसके बाद सुबह 9 बजकर 7 मिनट से दोपहर 12.23 तक दिन का मुख्य हनुमान पूजन मुहूर्त है. वहीं, कल शाम की आरती का समय 7 बजकर 3 मिनट से रात 8.06 तक रहेगा. ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य के अनुसार, इन तीनों समय पर की गई पूजा अचूक फल देती है.
पूजन की विधि
कल सुबह लाल स्नान कर वस्त्र धारण करें.
इसके बाद चमेली के शुद्ध तेल में सिंदूर मिलाकर जो भगवा-लाल लेप बनता है, उसे हनुमान जी की प्रतिमा पर मुख और छाती पर लगाएं.
इसके बाद धूप-अगरबत्ती जलाएं, फिर नीचे बताए भोग अर्पित करें और अंत में हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ जरूर करें.
रोट का भोग
रोट या चूरमा बजरंगबली को सबसे प्रिय है,जो गेहूं के आटे, गुड़, ड्राई फ्रूट और खूब सारे देसी घी से बनता है. मान्यता है कि इससे जीवन का हर भारीपन दूर होता है.
गुड़ और चना
हनुमान जी को गुड़ और चने का प्रसाद चढ़ाने से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं. भले ही यह एक सरल उपाय है, लेकिन यह बहुत असरदार और फलदायी है.
बूंदी और लड्डू
केवल गणपति को ही नहीं,बल्कि भगवान हनुमान को भी बूंदी के लड्डू बेहद भाते हैं. उन्हें बूंदी भी बेहद प्रिय हैं. मान्यता है कि इस भोग को लगाने और फिर भक्तों में बांटने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं.
केसर भात
बुढ़वा मंगल पर हनुमान जी को चावल, चीनी और केसर से बना यह पीला-सुगंधित भात चढ़ाएं. इससे हनुमान मंगल दोष कम करते हैं. जिनकी कुंडली में मंगल कमजोर है, उन्हें यह जरूर चढ़ाणा चाहिए.
पान का बीड़ा
सुपारी, गुलकंद और सौंफ से बना मीठा पान भी हनुमान जी का एक प्रिय भोग है, जिसे सदियों से अर्पित किया जा रहा है. ध्यान रखें, इसमें तंबाकू या कोई नशीली चीज बिल्कुल न हो.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.