Ayodhya Ram Mandir: धर्मनगरी अयोध्या में 29 अप्रैल 2026 की संध्या इतिहास के पन्नों पर अमिट छाप छोड़ गई. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैशाख शुक्ल त्रयोदशी के पावन अवसर पर राम जन्मभूमि परिसर के उत्तर-पूर्वी कोने में स्थित शंभू महादेव के मंदिर पर भव्य ध्वजारोहण किया. वैदिक मंत्रोच्चार और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच हुआ यह आयोजन शैव-वैष्णव एकता का अद्भुत प्रतीक बन गया. इसी के साथ पांचों पूरक देवालयों की ध्वज स्थापना का पुण्य चक्र पूरा हो गया.
क्या है ईशान कोण का रहस्य?
मंदिर के परकोटे में शिव मंदिर का ध्वज ठीक ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में ही क्यों फहराया गया, इसके पीछे गहरा वास्तुशास्त्रीय कारण है. ईशान कोण को देवताओं का स्थान माना जाता है. यह दिशा ज्ञान, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का सबसे सघन केंद्र है। यह मंदिर राम जन्मभूमि परिसर की सीमा दीवार के भीतर बनाए गए पांच दिव्य धामों में से एक है. ऐसे कोण पर स्थित मंदिर पर ध्वज लहराना अत्यंत शुभ और दैवीय तरंगों को पूरे क्षेत्र में प्रवाहित करता है.
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ध्वजदंड की भव्यता और माप
शंभू महादेव के ध्वजदंड की ऊंचाई और उस पर लहराने वाला भगवा पताका अपनी भव्यता से हर आने वाले का ध्यान खींच रहा है. ध्वजदंड पूरे 19 फीट 7 इंच ऊंचा है। इस पर फहराए गए भगवा ध्वज की लंबाई 9 फीट 3 इंच और चौड़ाई 4 फीट 7 इंच रखी गई है. हवा में गर्व से लहराता यह विशाल ध्वज दूर से ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. इसका हर स्पंदन मानो प्रभु श्रीराम के आराध्य देवता के प्रति समर्पण का संदेश देता है.
पूरा हुआ पंचदेवों का शृंगार
इस ध्वजारोहण के साथ ही राम मंदिर परिसर में पंचदेवों के शृंगार का विराट आयोजन पूर्ण हो गया. इससे पहले मुख्य रामलला मंदिर के अलावा माता अन्नपूर्णा, सूर्यदेव, हनुमान जी और गणपति के मंदिरों पर ध्वज स्थापित किए जा चुके थे. बुधवार शाम करीब 5:45 बजे जैसे ही मुख्यमंत्री ने ध्वज फहराया, पूरा परिसर महादेव के जयकारों से गूंज उठा. यह नजारा भक्ति और ऊर्जा का अनूठा संगम था। अब श्रीराम जन्मभूमि की आध्यात्मिक सुरक्षा का वृत्त पूरी तरह साध लिया गया है.
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एकता का विराट संदेश
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्र और धर्म की एकता पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि हमारे देवता समाज को जोड़ने का ही काम करते हैं. जिस प्रकार भगवान शिव और श्रीराम एक-दूसरे के पूरक हैं, वैसे ही हम सभी को समाज को एक सूत्र में बांधकर राष्ट्र को शक्तिशाली बनाना है. उन्होंने इस आयोजन को मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का महापर्व बताया. ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ की मिली-जुली गूंज ने पूरे अयोध्या वासियों के साथ देश भर के श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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