हमारे साथ जुड़ें X IG YT FB
Trending: Gyanesh KumarsirBigg Boss 20

Pitru Paksh 2024: पितृपक्ष में किसी भी रूप में आ सकते हैं पितर, घर आएं इन जीवों का भूल से भी न करें अनादर, वरना...

Pitru Paksh 2024: हिंदू संस्कृति की ‘अतिथि देवो भव’ परंपरा का पितृपक्ष में विस्तार न केवल मनुष्य बल्कि पशु-पक्षियों से लेकर प्रकृति तक हो जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष में पितर किसी भी रूप में आ सकते हैं। आइए जानते हैं कि शास्त्रों में पितृपक्ष में पितर के किन-किन रूपों में आने की चर्चा की गई है?

विज्ञापन

Pitru Paksh 2024: हिंदू धर्म में पितृपक्ष परिवार और खानदान के पूर्वजों और पितरों की आत्मा की शांति का महाअनुष्ठान है, जो हर साल आश्विन महीने में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा (प्रथम तिथि) से आश्विन मास की अमावस्या तिथि तक रखा जाता है। हालांकि इस पितृपक्ष के तर्पण और पिंडदान की शुरुआत भादो मास की पूर्णिमा तिथि से ही शुरू हो जाता है। इस साल 17 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है, जो 2 अक्टूबर तक चलेगी।

किसी भी रूप में आ सकते हैं पितर

मान्यता कि श्राद्ध पक्ष में पितर धरती पर आते हैं। यह भी कहते हैं कि पितृपक्ष में पितरों का संबंध प्रकृति से भी होता है और वे पितृपक्ष में मनुष्य से लेकर पशु-पक्षी तक कई रूपों में घर के द्वार पर आ सकते हैं। बस हम उन्हें पहचान नहीं पाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष में पशु-पशियों के घर आने पर उन्हें खाना जरूर खिलाना चाहिए। ऐसा करने से घर में खुशहाली बनी रहती है। आर्थिक परेशानियां खत्म हो जाती हैं और घर में सदैव सुख-शांति का वास होता है। आइए जानते हैं कि पितृपक्ष में पितर किन-किन रूपों में आ सकते हैं?

मेहमान, गरीब और असहाय व्यक्ति

पितृ पक्ष के समय अगर घर में कोई मेहमान, गरीब और असहाय व्यक्ति आए तो उसका कभी अनादर न करना चाहिए और न उन्हें खाली हाथ जाने देना चाहिए, बल्कि उनका सत्कार कर उनके लिए भोजन की व्यवस्था करने चाहिए।

विज्ञापन

ये भी पढ़ें: Pitru Paksha 2024: सावधान! भूल से भी घर में यहां न लगाएं पूर्वजों और दिवंगतों की फोटो, जानें सही दिशा और स्थान

गाय या कुत्ते का भी द्वार पर आना

श्राद्ध पक्ष में गाय या कुत्ते का भी द्वार पर आना बहुत शुभ माना जाता है। अगर ये रास्ते में भी दिख जाए तो इन्हें भगाना या दुत्कारना नहीं चाहिए। बल्कि, इनको कुछ न कुछ खाने को जरूर देना चाहिए।

विज्ञापन

घर में कौए का आना

हिंदू धर्म में पितृपक्ष में घर आए कौए को भगाने की मनाही है, बल्कि मान्यता है कि कौए को भोजन देने से पितर और पूर्वज प्रसन्न होते हैं। कहते हैं, श्राद्ध पक्ष के 15-16 दिन तक पितर कौए के द्वारा ही अन्न ग्रहण करते हैं। इससे न सिर्फ वे तृप्त होते हैं, बल्कि परिवार पर खुशहाल जीवन का आशीष बरसाते हैं।

बंदर को भी  दें भोजन

हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि पितृपक्ष में बंदर को खाना खिलाना भी काफी शुभ होता है। यदि ये आपके घर खुद-ब-खुद आ जाएं तो कहा जाता कि पितर आपसे प्रसन्न हैं। ऐसे घर में सुख-शांति बनी रहती है।

विज्ञापन

ये भी पढ़ें:  Temples of India: जिंदा लड़की की समाधि पर बना है वाराणसी का यह मंदिर, दिल दहला देने वाला है इतिहास!

चींटियों को भी दें आहार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पितृपक्ष घर में अगर चींटियां आएं, तो उन्हें चीनी मिश्रित आटा खिलाना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और आर्थिक परेशानियां दूर रहती हैं।

विज्ञापन

भूल से भी न करें अनादर

मान्यता है पितृपक्ष में घर आए मनुष्यों और इन खास जीवों का भूल से भी अनादर नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से अपशकुन होना तय है। कहते हैं, घर आए इन जीवों में पितरों के रूप होते हैं, जिनका अनादर करने से पितर नाराज हो आते हैं। इससे घर में क्लेश, बीमारी और आर्थिक तंगी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

ये भी पढ़ें: Numerology: मां लक्ष्मी इन 4 मूलांकों की तारीखों में जन्मे लोगों पर रहती हैं मेहरबान, इनमें कहीं आप भी तो नहीं!

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

संबंधित खबरें

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola