Aja Ekadashi 2026 Date: एकादशी का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए बेहद खास होता है. भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन अजा एकादशी मनाई जाती है. अजा एकादशी व्रत 7 सितंबर को है. जीवन में सुख-समृद्धि की कामना और खुशहाली के लिए आप एकादशी का व्रत करें और विष्णु भगवान की पूजा करें. आइये अजा एकादशी व्रत के पूजा मुहूर्त, पारण और पूजा विधि के बारे में जानते हैं.

अजा एकादशी शुभ मुहूर्त (Aja Ekadashi Shubh Muhurat)

ब्रह्म मुहूर्त - 04:31 ए एम से 05:16 ए एम
प्रातः सन्ध्या - 04:53 ए एम से 06:02 ए एम
अभिजित मुहूर्त - 11:54 ए एम से 12:44 पी एम
विजय मुहूर्त - 02:25 पी एम से 03:15 पी एम
गोधूलि मुहूर्त - 06:36 पी एम से 06:59 पी एम
सायाह्न सन्ध्या - 06:36 पी एम से 07:45 पी एम
अमृत काल - 03:59 पी एम से 05:29 पी एम
निशिता मुहूर्त - 11:56 पी एम से 12:42 ए एम, 08 सितंबर
सर्वार्थ सिद्धि योग - 06:14 पी एम से 06:02 ए एम, 08 सितंबर

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अजा एकादशी व्रत का पारण

अजा एकादशी व्रत के दिन आप शुभ मुहूर्त में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना कर सकते हैं. व्रत का पारण अगले दिन 8 सितंबर को सुबह 6 बजकर 2 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 33 मिनट के बीच व्रत का पारण कर सकते हैं. आपको विष्णु भगवान की पूजा करनी चाहिए.

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विष्णु भगवान की पूजा (Vishnu Bhagwan Puja Vidhi)

एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थान की सफाई करें. इसके बाद लकड़ी की चौकी लगाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें. प्रतिमा के समक्ष दीप और धूप जलाएं. फल और मिठाई का भोग लगाएं और आरती कर पूजा संपन्न करें.

विष्णु भगवान की आरती

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।
स्वामी दुःख विनसे मन का।
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे…

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मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
स्वामी तुम अन्तर्यामी।
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

स्वामी तुम पालन-कर्ता।
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।
स्वामी सबके प्राणपति।
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे…
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।
स्वामी तुम ठाकुर मेरे।
अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे…

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विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे…
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।
स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे…

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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