Adhik Maas Purnima 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर तीन साल बाद अधिकमास वाला वर्ष आता है. हर 32 या 33 महीने बाद अधिकमास आता है. इस दौरान अधिकमास चल रहा है. इस साल ज्येष्ठ का महीना एक नहीं, बल्कि दो है. यह अधिकमास का ज्येष्ठ महीना चल रहा है. अधिकमास को मलमास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जानते हैं. यह महीना विष्णु भगवान की पूजा के लिए खास होता है. अधिकमास की पूर्णिमा का दिन पूजा और व्रत के लिए खास होता है. अधिकमास की पूर्णिमा कब है चलिए जानते हैं.
कब है अधिकमास पूर्णिमा?
ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 30 मई की सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर हो रहा है. इसका समापन अगले दिन दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत 30 मई को रखना उचित होगा. वहीं स्नान-दान के लिए 31 मई का दिन शुभ है. अधिकमास पूर्णिमा इस प्रकार दोनों दिन मान्य होगी. हालांकि, व्रत 30 मई और स्नान-दान 31 मई को किया जाएगा.
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अधिकमास पूर्णिमा पूजा और उपाय
आप अधिकमास की पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदी में स्नान करें और विष्णु भगवान की पूजा करें. आप सुबह उठकर पवित्र नदी में स्नान करें या आप घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं. इसके बाद व्रत का संकल्प लें और विधि-विधान से विष्णु भगवान की पूजा करें. भगवान विष्णु को पीले फल, पीली मिठाई, धूप, दीप आदि अर्पित करें. आरती और मंत्रों का जाप कर व्रत संपन्न करें. पूर्णिमा पर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय और ॐ गौरीशंकराय नमः मंत्रों का जाप करें. इस उपाय से आपको लाभ मिलेगा.
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अधिकमास पूर्णिमा का महत्व
अधिकमास में पड़ने वाली पूर्णिमा को पुरुषोत्तम पूर्णिमा कहते हैं. यह दिन विष्णु भगवान की पूजा के लिए अत्यंत शुभ होता है. अधिकमास पूर्णिमा हर तीन साल में एक बार आती है. ऐसे में यह बहुत ही विशेष होती है. इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु जी की पूजा करें. अधिकमास पूर्णिमा पर धार्मिक कार्य करने से कई गुना अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.