Shri Sitaram Stotram Lyrics: श्री सीताराम स्तोत्रम् एक शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसकी रचना खुद हनुमान जी ने की थी. हनुमान जी ने श्री सीताराम स्तोत्रम् में भगवान राम और माता सीता के युगल स्वरूप का वर्णन किया है. साथ ही उनके गुण, भक्ति, शक्ति और करुणा का गुणगान किया गया है, जिसके पाठ से हनुमान जी के साथ-साथ राम जी और सीता माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है. साथ ही मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति सही मार्ग पर आगे बढ़ता है. हालांकि, कुछ लोग अपनी विशेष मनोकामना को पूरा करने के लिए भी श्री सीताराम स्तोत्रम् का पाठ करते हैं.
चलिए अब जानें श्री सीताराम स्तोत्रम् के लिरिक्स और पाठ से जुड़े नियमों के बारे में.
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श्री सीताराम स्तोत्रम्
कमल लोचनौ राम कांचनाम्बरौ कवचभूषणौ राम कार्मुकान्वितौ।
कलुषसंहारौ राम कामितप्रदौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥१॥
मकरकुण्डलौ राम मौलिसेवितौ मणिकिरीटिनौ राम मञ्जुभाषिणौ।
मनुकुलोद्भवौ राम मानुषोत्तमौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥२॥
सत्यसम्पन्नौ राम समरभीकरौ सर्वरक्षणौ राम सर्वभूषणौ।
सत्यमानसौ राम सर्वपोषितौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥३॥
धृतशिखण्डिनौ राम दीनरक्षकौ धृतहिमाचलौ राम दिव्यविग्रहौ।
विविधपूजितौ राम दीर्घदोर्युगौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥४॥
भुवनजानुकौ राम पादचारिणौ पृथुशिलीमुकौ राम पापनाङ्घ्रिकौ।
परमसात्विकौ राम भक्तवत्सलौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥५॥
वनविहारिणौ राम वल्कलांबरौ वनफलाशिनौ राम वासवार्चितौ।
वरगुणाकरौ राम वालिमर्दनौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥६॥
दशरथात्मजौ राम पशुपतिप्रियौ शशिनिवासिनौ राम विशदमानसौ।
दशमुखान्तकौ राम निशितसायकौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥७॥
कमल लोचनौ राम समरपण्डितौ भीमविग्रहौ राम कामसुन्दरौ।
दामभूषणौ राम हेमनूपुरौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥८॥
भरतसेवितौ राम दुरितमोचकौ करधृताशुगौ राम सूकरस्तुतौ।
शरधि धारणौ राम धीरकवचिनौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥९॥
धर्मचारिणौ राम कर्मसाक्षिणौ धर्मकार्मुखौ राम शर्मदायकौ।
धर्मशोभितौ राम कर्ममोदिनौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥१०॥
नीलदेहिनौ राम लोलकुन्दलौ कालभीकरौ राम वालिमर्दनौ।
कलुषहारिणौ राम ललितभूषणौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥११॥
मातृनन्दनौ राम भाद्रबालकौ भ्रातॄ सम्मतौ राम शत्रुसूदकौ।
भ्रातृशेखरौ राम सेतुनायकौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥१२॥
शरधिबन्धनौ राम दलितदानवौ कुलविवर्धनौ राम बलविराजितौ।
सोलजाजितौ राम बलविराजितौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥१३॥
राजलक्षणौ राम विजय काङ्क्षिणौ गजवरारुहौ राम पूजितामरौ।
विजितमत्सरौ राम भजितवारणौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥१४॥
सर्वमानितौ राम सर्वकारिणौ गर्वभञ्जनौ राम निर्विकारणौ।
दुर्विभासितौ राम सर्वभासकौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥१५॥
रविकुलोद्भवौ राम भवविनाशकौ कानकाश्रितौ राम पादकोशकौ।
रविसुतप्रियौ राम कविभिरीडितौ रहसि नौमि तौ सीतारामलक्ष्मणौ॥१६॥
राम राघव सीता राम राघव राम राघव सीता राम राघव।
कृष्णकेशव राधा कृष्णकेशव कृष्णकेशव राधा कृष्णकेशव॥१७॥
सीताराम सीताराम सीताराम…
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श्री सीताराम स्तोत्रम् के पाठ से जुड़े नियम
- स्नान करने के बाद शुद्ध मन से ही स्तोत्रम् पढ़ें.
- जल्दबाजी में स्तोत्रम् के शब्दों का गलत उच्चारण नहीं करना चाहिए.
- आसन पर बैठकर ही पाठ करना चाहिए.
- खड़े होकर या चलते हुए पाठ करने से बचना चाहिए.
- यदि आप नियमित स्तोत्रम् का पाठ करते हैं तो तामसिक भोजन न खाएं.
- पाठ शुरू करने से पहले देवी-देवताओं का स्मरण जरूर करें.
- प्रात: काल या प्रदोष काल में ही पाठ करें.
- यदि आप नियमित स्तोत्रम् का पाठ करते हैं तो ब्रह्मचर्य का पालन करें.
- पाठ के दौरान सामने देवी-देवताओं की मूर्ति या तस्वीर जरूर रखें.
- पाठ खत्म होने के बाद आरती करें.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.