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भोलेबाबा की कृपा से पूरी होगी हर इच्छा, रोजाना करें Shankaracharya Krit Shivashtakam का पाठ, देखें Lyrics

Shankaracharya Krit Shivashtakam Lyrics: क्या आप भी भोलेबाबा की कृपा पाना चाहते हैं? यदि हां, तो रोजाना शंकराचार्य कृत शिवाष्टकम का पाठ कर सकते हैं. शास्त्रों में शंकराचार्य कृत शिवाष्टकम को महाशक्तिशाली स्तोत्र माना गया है, जिसके जाप से बड़े से बड़े संकट से मुक्ति मिल सकती है. चलिए जानें शंकराचार्य कृत शिवाष्टकम के लिरिक्स, महत्व और अन्य जरूरी बातों के बारे में.

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Credit- AI Gemini

Shankaracharya Krit Shivashtakam Lyrics: शंकराचार्य कृत शिवाष्टकम एक अत्यंत शक्तिशाली व प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसमें कुल 8 श्लोक हैं. ये स्तोत्र पूर्ण रूप से देवों के देव महादेश को समर्पित है, जिसमें शिव जी के विभिन्न स्वरूपों, गुणों, महिमा, करुणा और कृपा आदि का विस्तृत वर्णन किया गया है. मान्यता है कि इसके पाठ से हर संकट दूर हो सकता है. खासकर, किसी मनोकामना पूर्ति के लिए विधिपूर्वक शंकराचार्य कृत शिवाष्टकम का पाठ करना शुभ रहता है.

यहां पर से आप शंकराचार्य कृत शिवाष्टकम के सही व पूर्ण लिरिक्स पढ़ सकते हैं.

शंकराचार्य कृत शिवाष्टकम के लिरिक्स

॥ शिवाष्टकम् ॥

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तस्मै नमः परमकारणकारणाय, दीप्तोज्ज्वलज्ज्वलितपिङ्गललोचनाय।
नागेन्द्रहारकृतकुण्डलभूषणाय, ब्रह्मेन्द्रविष्णुवरदाय नमः शिवाय॥1॥
श्रीमत्प्रसन्नशशिपन्नगभूषणाय, शैलेन्द्रजावदनचुम्बितलोचनाय।
कैलासमन्दरमहेन्द्रनिकेतनाय, लोकत्रयार्तिहरणाय नमः शिवाय॥2॥
पद्मावदातमणिकुण्डलगोवृषाय, कृष्णागरुप्रचुरचन्दनचर्चिताय।
भस्मानुषक्तविकचोत्पलमल्लिकाय, नीलाब्जकण्ठसदृशाय नमः शिवाय॥3॥
लम्बत्सपिङ्गलजटामुकुटोत्कटाय, दंष्ट्राकरालविकटोत्कटभैरवाय।
व्याघ्राजिनाम्बरधराय मनोहराय, त्रैलोक्यनाथनमिताय नमः शिवाय॥4॥
दक्षप्रजापतिमहामखनाशनाय, क्षिप्रं महात्रिपुरदानवघातनाय।
ब्रह्मोर्जितोर्ध्वगकरोटिनिकृन्तनाय, योगाय योगनमिताय नमः शिवाय॥5॥
संसारसृष्टिघटनापरिवर्तनाय, रक्षः पिशाचगणसिद्धसमाकुलाय।
सिद्धोरगग्रहगणेन्द्रनिषेविताय, शार्दूलचर्मवसनाय नमः शिवाय॥6॥
भस्माङ्गरागकृतरूपमनोहराय, सौम्यावदातवनमाश्रितमाश्रिताय।
गौरीकटाक्षनयनार्धनिरीक्षणाय, गोक्षीरधारधवलाय नमः शिवाय॥7॥
आदित्यसोमवरुणानिलसेविताय, यज्ञाग्निहोत्रवरधूमनिकेतनाय।
ऋक्सामवेदमुनिभिः स्तुतिसंयुताय, गोपाय गोपनमिताय नमः शिवाय॥8॥
शिवाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ, शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

॥ इति श्री शङ्कराचार्यकृतं शिवाष्टकं सम्पूर्णम् ॥

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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