Trending: CJP ProtestGyanesh KumarSIRBigg Boss 20

Radha Kripa Kataksh Stotram: रोजाना पढ़ें राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र, मायाजाल से बचे रहेंगे

Radha Kripa Kataksh Stotram Lyrics: भगवान कृष्ण की परम सखी राधा रानी को बहुत ही दयालु माना जाता है, जिनकी विशेष कृपा प्राप्त करना बहुत आसान है. नियमित रूप से पूजा-पाठ व नाम जाप से लाडली जी खुश हो जाती हैं. हालांकि, पूजा के दौरान राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ होता है, जिसके प्रभाव से न सिर्फ जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं, बल्कि श्रीजी भी प्रसन्न रहती हैं. यहां पर आप राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र के महत्व, लिरिक्स और लाभ आदि के बारे में जान सकते हैं.

विज्ञापन
Radha Kripa Kataksh Stotram: रोजाना पढ़ें राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र, मायाजाल से बचे रहेंगे
Credit- AI Gemini

Radha Kripa Kataksh Stotram Lyrics: राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र एक शक्तिशाली व प्रभावशाली स्तुति है, जो कि देवों के देव महादेव ने रची थी. इस स्तोत्र में भगवान कृष्ण की परम सखी राधा रानी के श्रृंगार, अलौकिक सौंदर्य, गुण और करुणा का वर्णन किया गया है. मान्यता है कि जो भी व्यक्ति रोजाना राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का सच्चे मन से पाठ करता है, उसका राधा रानी जीवन के हर मोड़ पर साथ देती हैं. साथ ही व्यक्ति मायाजाल से दूर शांति से अपना जीवन व्यतीत करता है. इसके अलावा व्यक्ति को कृष्ण जी के क्रोध का भी सामना नहीं करना पड़ता है. चलिए अब जानते हैं राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र के सही लिरिक्स और पढ़ने-सुनने की विधि के बारे में.

राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र (Radha Kripa Kataksh Stotram Lyrics)

मुनीन्द्र–वृन्द–वन्दिते त्रिलोक–शोक–हारिणि।
प्रसन्न-वक्त्र-पण्कजे निकुञ्ज-भू-विलासिनि।।
व्रजेन्द्र–भानु–नन्दिनि व्रजेन्द्र–सूनु–संगते।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
अशोक–वृक्ष–वल्लरी वितान–मण्डप–स्थिते।
प्रवालबाल–पल्लव प्रभारुणांघ्रि–कोमले।।
वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
अनङ्ग-रण्ग मङ्गल-प्रसङ्ग-भङ्गुर-भ्रुवां।
सविभ्रमं ससम्भ्रमं दृगन्त–बाणपातनैः।।
निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
तडित्–सुवर्ण–चम्पक–प्रदीप्त–गौर–विग्रहे।
मुख–प्रभा–परास्त–कोटि–शारदेन्दुमण्डले।।
विचित्र-चित्र सञ्चरच्चकोर-शाव-लोचने।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
मदोन्मदाति–यौवने प्रमोद–मान–मण्डिते।
प्रियानुराग–रञ्जिते कला–विलास–पण्डिते।।
अनन्यधन्य–कुञ्जराज्य–कामकेलि–कोविदे।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
अशेष–हावभाव–धीरहीरहार–भूषिते।
प्रभूतशातकुम्भ–कुम्भकुम्भि–कुम्भसुस्तनि।।
प्रशस्तमन्द–हास्यचूर्ण पूर्णसौख्य–सागरे।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
मृणाल-वाल-वल्लरी तरङ्ग-रङ्ग-दोर्लते।
लताग्र–लास्य–लोल–नील–लोचनावलोकने।।
ललल्लुलन्मिलन्मनोज्ञ–मुग्ध–मोहिनाश्रिते।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
सुवर्णमलिकाञ्चित –त्रिरेख–कम्बु–कण्ठगे।
त्रिसूत्र–मङ्गली-गुण–त्रिरत्न-दीप्ति–दीधिते।
सलोल–नीलकुन्तल–प्रसून–गुच्छ–गुम्फिते।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
नितम्ब–बिम्ब–लम्बमान–पुष्पमेखलागुणे।
प्रशस्तरत्न-किङ्किणी-कलाप-मध्य मञ्जुले।।
करीन्द्र–शुण्डदण्डिका–वरोहसौभगोरुके।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
अनेक–मन्त्रनाद–मञ्जु नूपुरारव–स्खलत्।
समाज–राजहंस–वंश–निक्वणाति–गौरवे।।
विलोलहेम–वल्लरी–विडम्बिचारु–चङ्क्रमे।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
अनन्त–कोटि–विष्णुलोक–नम्र–पद्मजार्चिते।
हिमाद्रिजा–पुलोमजा–विरिञ्चजा-वरप्रदे।।
अपार–सिद्धि–ऋद्धि–दिग्ध–सत्पदाङ्गुली-नखे।
कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम्।।
मखेश्वरि क्रियेश्वरि स्वधेश्वरि सुरेश्वरि।
त्रिवेद–भारतीश्वरि प्रमाण–शासनेश्वरि।।
रमेश्वरि क्षमेश्वरि प्रमोद–काननेश्वरि।
व्रजेश्वरि व्रजाधिपे श्रीराधिके नमोस्तुते।।
इती ममद्भुतं-स्तवं निशम्य भानुनन्दिनी।
करोतु सन्ततं जनं कृपाकटाक्ष-भाजनम्।।
भवेत्तदैव सञ्चित त्रिरूप–कर्म नाशनं।
लभेत्तदा व्रजेन्द्र–सूनु–मण्डल–प्रवेशनम्।।
राकायां च सिताष्टम्यां दशम्यां च विशुद्धधीः।
एकादश्यां त्रयोदश्यां यः पठेत्साधकः सुधीः।।
यं यं कामयते कामं तं तमाप्नोति साधकः।
राधाकृपाकटाक्षेण भक्तिःस्यात् प्रेमलक्षणा।।
ऊरुदघ्ने नाभिदघ्ने हृद्दघ्ने कण्ठदघ्नके।
राधाकुण्डजले स्थिता यः पठेत् साधकः शतम्।।
तस्य सर्वार्थ सिद्धिः स्याद् वाक्सामर्थ्यं तथा लभेत्।
ऐश्वर्यं च लभेत् साक्षाद्दृशा पश्यति राधिकाम्।।
तेन स तत्क्षणादेव तुष्टा दत्ते महावरम्।
येन पश्यति नेत्राभ्यां तत् प्रियं श्यामसुन्दरम्।।
नित्यलीला–प्रवेशं च ददाति श्री-व्रजाधिपः।
अतः परतरं प्रार्थ्यं वैष्णवस्य न विद्यते।।

॥इति श्रीमदूर्ध्वाम्नाये श्रीराधिकायाः कृपाकटाक्षस्तोत्रं सम्पूर्णम॥

विज्ञापन

ये भी पढ़ें- Sankat Nashan Ganesh Stotra: रोजाना नहीं तो संकष्टी चतुर्थी पर जरूर करें संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ, धन-खुशियों से भरा रहेगा जीवन

कैसे करें राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र का पाठ?

  • सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें.
  • राधा-कृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं.
  • हो सके तो राधा रानी को फल, फूल, मिठाई, वस्त्र और श्रृंगार का सामान अर्पित करें.
  • राधा रानी का स्मरण करने के बाद उन्हें प्रणाम करें, जिसके बाद राधा कृपा कटाक्ष पढ़ें या सुनें.
  • जाने-अनजाने में की गई गलतियों के लिए माफी मांगने के बाद अपनी इच्छा को बोलें.
  • अंत में राधा और कृष्ण जी की साथ में आरती जरूर करें.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

विज्ञापन

संबंधित खबरें

Tags:

न्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

Know More: Editorial Guidelines

लेख समाप्त

ताज़ा खबरें

Sponsored Links by Taboola