Dhanteras 2026: आज कार्तिक माह की त्रयोदशी तिथि है. आज 6 नवंबर को धनतेरस का पर्व मनाया जा रहा है. धनतेरस पर मां लक्ष्मी, कुबेर देवता और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विधान है. धन की देवी मां लक्ष्मी के साथ ही धन-संपत्ति के रक्षक के रूप में कुबेर देवता को पूजा जाता है. हिंदू धर्म में भगवान कुबेर को धन के देवता, यक्षों के राजा और संसार के खजाने के संरक्षक माना जाता है.
आज धनतेरस के अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा के साथ ही कुबेर देवता की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. इसके साथ ही कुबेर देवता की आरती करें. कुबेर देवता के चालीसा का पाठ करें. ऐसा करने से आपको जीवन में धन की कमी नहीं होगी. धनतेरस पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर की पूजा करने का खास महत्व है. ऐसा करने से घर में सुख-संपन्नता और स्थिर लक्ष्मी का वास होता है. आप यहां कुबेर देव की आरती और चालीसा के लिरिक्स पढ़े सकते हैं.
कुबेर देव की आरती (Kuber Dev ki Aarti)
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे,स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के,भण्डार कुबेर भरे॥
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,कई-कई युद्ध लड़े॥
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे,सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,सब जय जय कार करैं॥
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
गदा त्रिशूल हाथ में,शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन,धनुष टंकार करें॥
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
भाँति भाँति के व्यंजन बहुत बने,स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,साथ में उड़द चने॥
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
बल बुद्धि विद्या दाता,हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े
अपने भक्त जनों के,सारे काम संवारे॥
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
मुकुट मणी की शोभा,मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले।
अगर कपूर की बाती,घी की जोत जले॥
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
यक्ष कुबेर जी की आरती,जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत प्रेमपाल स्वामी,मनवांछित फल पावे॥
ॐ जै यक्ष कुबेर हरे…॥
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कुबेर देव चालीसा (Kuber Dev Chalisa)
दोहा
जैसे अटल हिमालय,और जैसे अडिग सुमेर।
ऐसे ही स्वर्ग द्वार पै,अविचल खड़े कुबेर॥
विघ्न हरण मंगल करण,सुनो शरणागत की टेर।
भक्त हेतु वितरण करो,धन माया के ढ़ेर॥
चौपाई
जय जय जय श्री कुबेर भण्डारी।धन माया के तुम अधिकारी॥
तप तेज पुंज निर्भय भय हारी।पवन वेग सम सम तनु बलधारी॥
स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी।सेवक इन्द्र देव के आज्ञाकारी॥
यक्ष यक्षणी की है सेना भारी।सेनापति बने युद्ध में धनुधारी॥
महा योद्धा बन शस्त्र धारैं।युद्ध करैं शत्रु को मारैं॥
सदा विजयी कभी ना हारैं।भगत जनों के संकट टारैं॥
प्रपितामह हैं स्वयं विधाता।पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता॥
विश्रवा पिता इडविडा जी माता।विभीषण भगत आपके भ्राता॥
शिव चरणों में जब ध्यान लगाया।घोर तपस्या करी तन को सुखाया॥
शिव वरदान मिले देवत्य पाया।अमृत पान करी अमर हुई काया॥
धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में।देवी देवता सब फिरैं साथ में॥
पीताम्बर वस्त्र पहने गात में।बल शक्ति पूरी यक्ष जात में॥
स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं।त्रिशूल गदा हाथ में साजैं॥
शंख मृदंग नगारे बाजैं।गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं॥
चौंसठ योगनी मंगल गावैं।ऋद्धि सिद्धि नित भोग लगावैं॥
दास दासनी सिर छत्र फिरावैं।यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढूलावैं॥
ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं।देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं॥
पुरुषों में जैसे भीम बली हैं।यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं॥
भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं।पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं॥
नागों में जैसे शेष बड़े हैं।वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं॥
कांधे धनुष हाथ में भाला।गले फूलों की पहनी माला॥
स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला।दूर दूर तक होए उजाला॥
कुबेर देव को जो मन में धारे।सदा विजय हो कभी न हारे॥
बिगड़े काम बन जाएं सारे।अन्न धन के रहें भरे भण्डारे॥
कुबेर गरीब को आप उभारैं।कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं॥
कुबेर भगत के संकट टारैं।कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं॥
शीघ्र धनी जो होना चाहे।क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं॥
यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं।दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं॥
भूत प्रेत को कुबेर भगावैं।अड़े काम को कुबेर बनावैं॥
रोग शोक को कुबेर नशावैं।कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं॥
कुबेर चढ़े को और चढ़ादे।कुबेर गिरे को पुनः उठा दे॥
कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे।कुबेर भूले को राह बता दे॥
प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे।भूखे की भूख कुबेर मिटा दे॥
रोगी का रोग कुबेर घटा दे।दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे॥
बांझ की गोद कुबेर भरा दे।कारोबार को कुबेर बढ़ा दे॥
कारागार से कुबेर छुड़ा दे।चोर ठगों से कुबेर बचा दे॥
कोर्ट केस में कुबेर जितावै।जो कुबेर को मन में ध्यावै॥
चुनाव में जीत कुबेर करावैं।मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं॥
पाठ करे जो नित मन लाई।उसकी कला हो सदा सवाई॥
जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई।उसका जीवन चले सुखदाई॥
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जो कुबेर का पाठ करावै।उसका बेड़ा पार लगावै॥
उजड़े घर को पुनः बसावै।शत्रु को भी मित्र बनावै॥
सहस्र पुस्तक जो दान कराई।सब सुख भोग पदार्थ पाई॥
प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई।मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई॥
दोहा
शिव भक्तों में अग्रणी,श्री यक्षराज कुबेर।
हृदय में ज्ञान प्रकाश भर,कर दो दूर अंधेर॥
कर दो दूर अंधेर अब,जरा करो ना देर।
शरण पड़ा हूं आपकी,दया की दृष्टि फेर॥
कब करें आरती और चालीसा?
आज शाम को शुभ मुहूर्त में धनतेरस की पूजा के बाद कुबेर देवता को प्रसन्न करने के लिए आप आरती और चालीसा का पाठ कर सकते हैं. आज मां लक्ष्मी और कुबेर देव की विधि विधान से पूजा करें. पूजा के दौरान मां लक्ष्मी चालीसा और कुबेर देव चालीसा का पाठ करें. इसके बाद पूजा के अंत में आरती कर पूजा संपन्न करें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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