Gautam Buddha Ki Aarti: गौतम बुद्ध एक दार्शनिक और आध्यात्मिक शिक्षक थे, जिन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की थी. 6ठी शताब्दी ईसा पूर्व में गौतम बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी में राजा शुद्धोधन के यहां हुआ था. हालांकि, उन्होंने मात्र 29 साल की उम्र में राजपाठ छोड़ कड़ी तपस्या करने का निश्चय किया था. उन्होंने ये फैसला जीवन के दुखों से मुक्ति पाने और सत्य की खोज करने के लिए किया था. कहा जाता है कि गौतम बुद्ध ने बहुत ही कम उम्र में अद्भुत ज्ञान प्राप्त किया और फिर लोगों को अहिंसा तथा सत्य मार्ग पर चलने की शिक्षा दी.

गौरतलब है कि आज देश में बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी हैं, जो उनके उपदेशों को खुशी-खुशी फॉलो करते हैं. साथ ही उनकी पूजा करते हैं. यहां पर से आप गौतम बुद्ध की आरती पढ़ सकते हैं, जिसे पढ़ने से मन को शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है.

गौतम बुद्ध की आरती

कंचन थाल पंचशील को जलाओ।
गावो रे मन बुद्ध जी की आरती गावो।।
जो जन बुद्ध जी की आरती गावे।
सुख संपत्ति जीवन फल पावे।।
सब जन मिल जुल ताली बजावो।
गावो रे मन बुद्ध जी की आरती गावो।।
कस्ट मिटेगा हरेंगे दुःख पीरा।
बुद्ध जी के जैसा नहीं कोई जग में हीरा।।
श्रद्धा सुमन अपने मन में सजावो।
गावो रे मन बुद्ध जी की आरती गावो।।
अंगुलिमाल डाकू से बन गया भिछु।
जन जन के लोग हुए प्रज्ञा के इच्छु ।।
लेके नाम बुद्ध जी का सफल तुम हो जाओ।
गावो रे मन बुद्ध जी की आरती गावो।।

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बुध पूर्णिमा का महत्व

बता दें कि बौद्ध अनुयायियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा बेहद खास होती है, जिस दिन प्राचीन काल में गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था. हर साल वैशाख पूर्णिमा के दिन बुध पूर्णिमा मनाई जाती है. इस दिन न सिर्फ गौतम बुद्ध की पूजा की जाती है, बल्कि उनके उपदेशों को याद भी किया जाता है. साथ ही कई जगहों पर गौतम बुद्ध को समर्पित विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और झांकी निकाली जाती है.

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