विमान क्रैश होने के बाद दुश्मन की धरती पर कैसे बचते हैं US पायलट? जानिए- कैसे किया जाता है उन्हें ट्रेंड
जब दुश्मन की सीमा में कोई लड़ाकू विमान गिरता है, तो असली जंग शुरू होती है. यह जंग सिर्फ पायलट की जान बचाने की नहीं, बल्कि देश की गोपनीय तकनीक और सम्मान को सुरक्षित रखने की भी होती है. ईरान द्वारा अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराए जाने के बाद, पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका के उस 'पर्सनल रिकवरी' ब्लूप्रिंट पर हैं, जो मिनटों के भीतर हरकत में आ जाता है. स्पेशल फोर्सेस से लेकर सैटेलाइट ट्रैकिंग तक, आखिर कैसे चलता है यह मिशन?

तुरंत एक्शन
2 / 7जैसे ही कोई विमान हिट होता है, रिकवरी टीमें तुरंत सक्रिय हो जाती हैं. इनका पहला मकसद पायलट को ढूंढना और दूसरा 'क्लासीफाइड' तकनीक को दुश्मन के हाथ लगने से बचाना होता है.
कड़ी ट्रेनिंग
3 / 7अमेरिकी पायलटों को कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है. इसमें वे सीखते हैं कि कैसे दुश्मन के पीछे छिपना है, गुप्त संचार करना है और पकड़े जाने पर दबाव झेलना है.
अंधेरे का फायदा
4 / 7रात के समय अमेरिकी सेना को 'सुपीरियर' माना जाता है. नाइट विजन टूल्स और इन्फ्रारेड संचार के जरिए पायलट अंधेरे में छिपकर अपनी लोकेशन रेस्क्यू टीम को भेजते हैं.
स्पेशल फोर्सेस का एक्शन
5 / 7पायलट को निकालने के लिए नेवी सील या एयरफोर्स पैरारेस्क्यू जंपर्स को भेजा जाता है, जिन्हें लड़ाकू विमानों और ड्रोन्स द्वारा हवाई सुरक्षा प्रदान की जाती है.
मलबे की तबाही
6 / 7अगर मलबे तक पहुंचना संभव न हो, तो अमेरिका उसे हवाई हमले के जरिए नष्ट कर देता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि रडार और हथियारों की तकनीक दुश्मन देशों के हाथ न लगे.
प्रोपेगेंडा से बचाव
7 / 7सेना के लिए पायलट का पकड़ा जाना एक बड़ी हार होती है, क्योंकि दुश्मन देश इसका इस्तेमाल प्रोपेगेंडा या सौदेबाजी के लिए कर सकते हैं. इसलिए यह पूरी रेस समय के खिलाफ होती है.
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