कितने टन का होता है ट्रेन का AC? कूलिंग इतनी ज्यादा, ओढ़ना पड़ता है कंबल
बाहर की चिलचिलाती धूप के बाद भी रेलवे की एसी ट्रेनों के अंदर जाते ही शिमला जैसी ठंडक का अहसास होने लगता है। रेलवे के AC कोच में आखिर कितने टन का एसी लगा होता है जो गर्मी को भी मात दे देता है? आइए जानते हैं रेलवे के हाई-टेक कूलिंग सिस्टम और काम करने के दिलचस्प तरीके के बारे में.

पहले 'टन' का मतलब जान लेते हैं
2 / 6ऐतिहासिक रूप से एक टन कूलिंग का यह मतलब होता है कि कोई सिस्टम 24 घंटे में एक टन यानी करीब 1000 किलोग्राम बर्फ को पिघलाने जितनी गर्मी को दूर कर सकता है. आज के संदर्भ में कहें तो 1 टन AC करीब 12,000 ब्रिटिश थर्मल यूनिट (BTU) प्रति घंटे की दर से गर्मी को कमरे से दूर कर सकती है. इस तरह एसी का टन जितना ज्यादा होगा ठंडक भी उतनी ही ज्यादा होगी.
कोच में इतने टन का होता है एसी
3 / 6अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर ट्रेन में कितने टन का एसी लगा होता है जो इतनी ठंडक देता है. ट्रेन के एक AC डिब्बे को ठंडा रखने के लिए सामान्य घरों में लगे एसी से कहीं ज्यादा क्षमता वाले यूनिट की जरूरत पड़ती है. भारतीय रेलवे के एक एसी कोच में आमतौर पर लगे एयर कंडीशनर की क्षमता करीब 7 से 8 टन तक होती है.
ठंडक में कोई फर्क नहीं पड़ता है
4 / 6रेलवे के AC सिस्टम की क्षमता आपके घर में लगे एयर कंडीशनर से कई ज्यादा होती है. और यही वजह है कि ज्यादा यात्री होने के बाद भी ठंडक में कोई फर्क नहीं पड़ता है. रेलवे AC सिर्फ हवा ठंडी नहीं करता बल्कि यह बाहर से ताजी हवा भी अंदर लाता रहता है जिससे कोच के अंदर ऑक्सीजन का लेवल सही रहे और यात्रियों को घुटन महसूस न हो.
40°C में भी काम करता है सिस्टम
5 / 6रेलवे के आधुनिक कोचों में Roof Mounted Package Unit यानी RMPU लगा होता है. यह टेक्नोलॉजी इसे खास बनाती है। यह सिस्टम कोच के अन्दर गर्म हवा को सोखता है उसे फिल्टर और ठंडा करता है और फिर वापस डक्ट्स के जरिए नीचे भेज देता है. ट्रेन में लगे सेंसर्स बाहर के टेंपरेचर को जान लेते हैं. अगर बाहर 40-45 डिग्री गर्मी है तो सिस्टम पूरी क्षमता से काम करने लगता है जिससे तापमान 23 से 25 डिग्री के बीच बना रहे.
यात्रियों पर निर्भर AC की क्षमता
6 / 6ज्यादातर एसी की क्षमता डिब्बे में यात्रियों की संख्या और उस कोच के प्रकार पर निर्भर करती है. इसके पीछे का कारण है कि यात्रियों की संख्या सीधे तौर पर डिब्बे के कूलिंग लोड को प्रभावित करती है. एसी फर्स्ट क्लास में कम यात्री होते हैं इसलिए इस कोच में 6.7 टन का एसी लगी होती है. एसी 2-टीयर में इसमें 5 टन के दो एसी लगे होते है. एसी 3-टीयर में यात्रियों की संख्या सबसे ज्यादा होती है इसलिए इसमें 7 टन के दो एसी होते हैं.
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