किसे लेनी चाहिए विटामिन D की गोली और किसे नहीं? जानिए क्या कहती है ताजा रिसर्च
करोड़ों लोग हर दिन अपनी हड्डियों को मजबूत बनाने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन D सप्लीमेंट लेते हैं. लेकिन क्या यह 'जादुई गोली' वाकई हर किसी के लिए फायदेमंद है? हालिया रिसर्च और 2025 में प्रकाशित नए ट्रायल्स ने इस पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. जहां कुछ मामलों में यह जान बचाने वाला साबित होता है, वहीं स्वस्थ वयस्कों के लिए यह महज एक अतिरिक्त खर्च और जोखिम भी हो सकता है.

क्या है विटामिन D
2 / 6हमारा शरीर धूप के संपर्क में आने पर विटामिन D बनाता है. यह हड्डियों की मजबूती और कैल्शियम सोखने के लिए जरूरी है, लेकिन आजकल धूप की कमी के कारण सप्लीमेंट्स का चलन बढ़ गया है.
हृदय रोग और कैंसर पर असर
3 / 625,000 वयस्कों पर हुई एक बड़ी अमेरिकी स्टडी में पाया गया कि विटामिन D की गोलियां हार्ट अटैक, स्ट्रोक या कैंसर को रोकने में मददगार नहीं रहीं. यहां तक कि याददाश्त बढ़ाने में भी इसके कोई ठोस सबूत नहीं मिले.
कैंसर से मौत का खतरा कम
4 / 6रिसर्च में एक अच्छी खबर भी मिली. जो लोग कम से कम दो साल से सप्लीमेंट ले रहे थे, उनमें कैंसर से मौत की संभावना 25% कम देखी गई. साथ ही, यह गठिया जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों के जोखिम को 22% तक घटा सकता है.
किसे है जरूरत
5 / 6नई गाइडलाइन्स के मुताबिक, 75 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और प्रीडायबिटीज के मरीजों को ही सप्लीमेंट की सलाह दी जाती है. स्वस्थ युवाओं को इसकी विशेष जरूरत नहीं है.
ओवरडोज का खतरा
6 / 6विटामिन D शरीर में जमा होता रहता है. ज्यादा मात्रा में लेने पर खून में कैल्शियम बढ़ सकता है, जिससे धमनियां खराब होने और किडनी स्टोन (पथरी) होने का खतरा बढ़ जाता है.
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